पुणे के एमपी–एमएलए कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि केस की सुनवाई के दौरान गुरुवार को एक बड़ा ड्रामा देखने को मिला। यह मामला हिंदुत्ववादी विचारक विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित आपत्तिजनक भाषण से जुड़ा है।
ब्लैंक सीडी देखकर कोर्ट में मचा हड़कंप
सुनवाई के दौरान वह सीलबंद सीडी कोर्ट में चलाई गई, जिसे केस का मुख्य सबूत बताया गया था। दावा किया गया था कि इसी सीडी में राहुल गांधी का वह विवादित भाषण मौजूद है, जिसके आधार पर केस शुरू हुआ और राहुल को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया गया था। लेकिन जैसे ही सीडी चलाई गई, कोर्ट में सभी हैरान रह गए—सीडी पूरी तरह खाली थी। न उसमें कोई वीडियो था, न ऑडियो। मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे, वकील और मौजूद लोग स्क्रीन पर कंटेंट आने का इंतजार करते रहे, पर कुछ नहीं चला।
“यही सीडी पहले कोर्ट में चलाई गई थी” — शिकायतकर्ता पक्ष
सावरकर के परपोते सत्यकी सावरकर की ओर से दलील दे रहे एडवोकेट संग्राम कोल्हटकर इस स्थिति से हैरान रह गए। उनका कहना था कि यही सीडी पहले भी कोर्ट में चलाई गई थी और उसी आधार पर समन जारी हुआ था। जब सीडी ब्लैंक निकली, तो कोल्हटकर ने कोर्ट को बताया कि राहुल गांधी का कथित भाषण यूट्यूब पर उपलब्ध है और उसे वहीं से देखकर भी सत्यापित किया जा सकता है। उन्होंने कोर्ट को उसका लिंक भी सौंप दिया।
राहुल गांधी के वकील ने यूट्यूब वीडियो को सबूत मानने का किया विरोध
राहुल गांधी की ओर से पेश वकील मिलिंद पवार ने इस मांग का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि बिना प्रमाणिकता वाले ऑनलाइन वीडियो को सबूत नहीं माना जा सकता। मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे ने भी इसे सही ठहराया और कहा कि इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 65B के तहत यूट्यूब लिंक को बिना प्रमाण पत्र के साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
क्या कहती है एविडेंस एक्ट की धारा 65B?
धारा 65B के मुताबिक, यदि कोई इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड—जैसे मोबाइल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, कंप्यूटर डेटा, ईमेल या ऑनलाइन कंटेंट—को कोर्ट में सबूत के रूप में पेश करना है, तो उसके साथ एक प्रमाणिकता प्रमाणपत्र (Certificate) देना अनिवार्य है।
यह प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करता है कि रिकॉर्ड असली है, सही डिवाइस से लिया गया है और उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है।
दो और सीडी पेश, मगर अपील खारिज
कोल्हटकर ने इसके बाद कोर्ट में दो और सीडी पेश कीं और अनुरोध किया कि उन्हें खुले कोर्ट में चलाकर देखा जाए।
लेकिन पवार ने फिर आपत्ति जताई और मजिस्ट्रेट ने यह अपील भी खारिज कर दी।
सीडी खाली कैसे हुई? न्यायिक जांच की मांग
सीडी के अचानक ब्लैंक निकलने पर कोल्हटकर ने कोर्ट से न्यायिक जांच की मांग की कि पहले सही चल रही सीडी अब खाली कैसे हो गई। उन्होंने केस की सुनवाई स्थगित करने की मांग भी रखी। हालांकि पवार ने इस पर भी विरोध जताया, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी। अब इस मामले पर सुनवाई 5 नवंबर को दोबारा होगी।


