अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जो इंसान की सांसों पर सीधा असर डालती है। इस बीमारी में मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है, सीने में जकड़न महसूस होती है, बार-बार खांसी आती है और कई बार अचानक अटैक भी पड़ सकता है। अगर समय पर मदद न मिले, तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
साल 2019 में आई ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 26 करोड़ से ज्यादा लोग अस्थमा से प्रभावित हैं। वहीं ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2022 बताती है कि भारत में ही करीब साढ़े 3 करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। यानी ये सिर्फ एक आम बीमारी नहीं, बल्कि एक बड़ा हेल्थ कंसर्न बन चुकी है।
अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि क्या अस्थमा सिर्फ बच्चों को होता है? लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है। बच्चे, युवा, मिडिल एज लोग या बुज़ुर्ग… कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है।
एक और बड़ी गलतफहमी ये है कि अस्थमा के मरीजों को एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। जबकि डॉक्टरों के मुताबिक, रेगुलर एक्सरसाइज अस्थमा को कंट्रोल में रखने में मदद करती है। इससे फेफड़े मजबूत होते हैं, तनाव कम होता है और वजन भी कंट्रोल में रहता है। स्ट्रेस और मोटापा दोनों ही अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं, इसलिए एक्टिव रहना फायदेमंद माना जाता है।
हालांकि, अगर किसी को उस समय सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो रही हो या अस्थमा अटैक चल रहा हो, तो एक्सरसाइज से बचना चाहिए। पहले डॉक्टर द्वारा दिए गए इनहेलर और दवाइयों से हालत को सामान्य करना जरूरी है। उसके बाद दोबारा धीरे-धीरे एक्सरसाइज शुरू की जा सकती है।
इनहेलर को लेकर भी लोगों के बीच कई भ्रम हैं। कई लोग मानते हैं कि इनहेलर इस्तेमाल करने से इसकी आदत पड़ जाती है। लेकिन मेडिकल साइंस ऐसा नहीं मानती। आदत उन चीजों की लगती है जो दिमाग पर असर डालती हैं, जैसे शराब या सिगरेट। इनहेलर में ऐसा कोई तत्व नहीं होता। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसका इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।
कुछ लोग ये भी सोचते हैं कि इनहेलर सिर्फ गंभीर अटैक के समय दिया जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। डॉक्टर बताते हैं कि जैसे ही अस्थमा की पहचान होती है, उसी समय से इनहेलर इलाज का अहम हिस्सा बन जाता है। अगर हालत ज्यादा गंभीर हो जाए, तब नेबुलाइज़र या दूसरी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या अस्थमा पूरी तरह ठीक हो सकता है? डॉक्टरों के मुताबिक, अस्थमा को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं माना जाता क्योंकि ये अक्सर जेनेटिक और एलर्जी से जुड़ी समस्या होती है। लेकिन सही इलाज, सावधानी और बेहतर लाइफस्टाइल की मदद से इसे लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सकता है। कई मरीज ऐसे भी होते हैं जिन्हें महीनों या सालों तक कोई दिक्कत महसूस नहीं होती।
अस्थमा के इलाज में आमतौर पर डॉक्टर कॉम्बिनेशन इनहेलर इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इसमें दो तरह की दवाइयां होती हैं। पहली ब्रोंकोडाइलेटर, जो सांस की नलियों को खोलकर सांस लेना आसान बनाती है। दूसरी इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, जो फेफड़ों की सूजन को कम करने का काम करती हैं। यही वजह है कि ये कॉम्बिनेशन इनहेलर अस्थमा को कंट्रोल करने में सबसे असरदार माने जाते हैं—चाहे रोजमर्रा की देखभाल हो या अचानक आई इमरजेंसी।


