इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, जिन पर यकीन करना आसान नहीं होता। कुछ कहानियां समय के साथ रहस्य बन जाती हैं, और कुछ इंसान खुद एक पहेली बनकर इतिहास में दर्ज हो जाते हैं। इंग्लैंड के जॉन ली की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ऐसा आदमी, जिसे अदालत ने मौत की सजा सुनाई… जिसे फांसी के तख्ते तक ले जाया गया… लेकिन तीन बार कोशिश के बावजूद उसे फांसी नहीं दी जा सकी।
आज भी जॉन ली को इतिहास में “The Man They Could Not Hang” यानी “वो आदमी जिसे फांसी नहीं दी जा सकी” के नाम से याद किया जाता है। लेकिन आखिर ऐसा हुआ कैसे? क्या ये तकनीकी खराबी थी, किसी की साजिश थी, या फिर वाकई कोई चमत्कार?
फांसी की वो सुबह जिसने इतिहास बदल दिया
23 फरवरी 1885 की सुबह इंग्लैंड के डेवॉन जेल में सबकुछ सामान्य लग रहा था। जेल प्रशासन एक कैदी को फांसी देने की तैयारी कर चुका था। कैदी का नाम था जॉन ली। उसके हाथ पीछे बंधे थे और चेहरे पर सफेद नकाब चढ़ा दिया गया था। जेलर के इशारे पर जल्लाद ने लीवर खींचा। लेकिन अगले ही पल ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद हर आदमी को हैरान कर दिया। फांसी का तख्ता खुला ही नहीं। जॉन ली अपनी जगह पर खड़ा रहा। पहले इसे तकनीकी खराबी माना गया। जॉन ली को हटाया गया और पूरे सिस्टम की जांच शुरू हुई। तख्ते और लीवर को ठीक किया गया। फिर परीक्षण के लिए एक दूसरे कैदी को उस तख्ते पर खड़ा किया गया। जैसे ही लीवर खींचा गया, तख्ता सही तरीके से खुल गया। इससे जेल अधिकारियों को लगा कि अब सब ठीक है।
लेकिन जब दोबारा जॉन ली को फांसी देने की कोशिश हुई, तब फिर वही हुआ। लीवर खिंचा, लेकिन तख्ता नहीं खुला। तीसरी बार भी यही नतीजा सामने आया। अब जेल में मौजूद लोग डर चुके थे। कुछ इसे भगवान का चमत्कार मान रहे थे, तो कुछ इसे किसी अनजानी ताकत का असर बता रहे थे। आखिरकार मेडिकल ऑफिसर के विरोध के बाद फांसी रोक दी गई और जॉन ली को वापस जेल भेज दिया गया।
कौन था जॉन ली?
जॉन ली का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। युवावस्था में उसने ब्रिटिश नेवी में काम किया, लेकिन चोट लगने के बाद उसे नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद उसने एक रिटायर्ड फौजी अधिकारी के घर नौकर का काम किया। कुछ समय बाद उस पर चोरी का आरोप लगा और उसे जेल भेज दिया गया। जेल से रिहा होने के बाद उसकी जिंदगी में एमा कीज़ नाम की एक अमीर महिला आई। एमा ने उसे अपने घर बागवानी का काम दे दिया। लेकिन यही नौकरी उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी मुसीबत बन गई।
एमा कीज़ की रहस्यमयी हत्या
15 नवंबर 1884 की रात एमा कीज़ अपने घर में मृत पाई गईं। उनकी बेरहमी से हत्या की गई थी और सबूत मिटाने के लिए घर में आग लगा दी गई थी। हत्या वाली रात घर में कई नौकर थे, लेकिन घटना के समय वहां सिर्फ जॉन ली मौजूद था। पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया। हालांकि उसके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं था। ना किसी ने उसे हत्या करते देखा था और ना ही उसके खिलाफ कोई मजबूत फॉरेंसिक सबूत था। फिर भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसे दोषी ठहराया गया।
सिर्फ 45 मिनट की सुनवाई के बाद अदालत ने उसे फांसी की सजा सुना दी।
क्या असली हत्यारा कोई और था?
इस केस में कई ऐसे पहलू थे जिन्होंने लोगों के मन में संदेह पैदा किया। जिस वकील ने जॉन ली का केस लड़ा, उसके बारे में अफवाह थी कि उसका जॉन की सौतेली बहन एलिज़ाबेथ हैरिस के साथ प्रेम संबंध था। बताया जाता है कि एलिज़ाबेथ उस समय गर्भवती भी थी। बाद में जॉन ली ने पुलिस अधिकारियों को एक अलग कहानी सुनाई। उसके अनुसार, हत्या वाली रात एमा कीज़ के घर में एक गुप्त पार्टी हुई थी। वहां शहर का एक संभ्रांत व्यक्ति और उसकी प्रेमिका मौजूद थे। शोर सुनकर एमा की नींद खुल गई और उनके बीच झगड़ा हो गया। गुस्से में उस व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से एमा की हत्या कर दी और बाद में सबूत मिटाने के लिए घर में आग लगा दी गई। जॉन ने दावा किया कि उसने सबूत छिपाने में मदद की थी, लेकिन असली हत्यारे का नाम उसने कभी नहीं बताया। कई लोगों का मानना था कि वह संभ्रांत व्यक्ति वही वकील था जो उसकी बहन के करीब था। हालांकि यह बात कभी साबित नहीं हो सकी।
क्या सच में चमत्कार हुआ था?
फांसी से एक रात पहले जॉन ली ने दो गार्ड्स से कहा था कि उसने सपना देखा है कि वह फांसी से बच जाएगा। अगले दिन वही हुआ। तीन बार कोशिश के बावजूद उसे फांसी नहीं दी जा सकी। जब यह मामला ब्रिटिश सरकार तक पहुंचा, तो गृह सचिव ने उसकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया। जॉन ली ने करीब 22 साल जेल में बिताए और 1907 में रिहा हुआ। लेकिन तब तक वह एक आम इंसान नहीं, बल्कि एक रहस्य बन चुका था। लोग उसे देखने आते थे। अखबार उसके इंटरव्यू छापते थे। कुछ लोग उसे भगवान का चमत्कार मानते थे, तो कुछ इसे महज तकनीकी खराबी कहते थे।
आखिर फांसी क्यों नहीं हुई?
इस सवाल का जवाब आज तक पूरी तरह नहीं मिल पाया है। जिस जेलर ने जॉन ली को फांसी देने की कोशिश की थी, उसने बाद में लिखा कि उस दिन भारी बारिश हुई थी। संभव है कि लकड़ी फूल गई हो और तख्ता जाम हो गया हो। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर तख्ता जाम था, तो परीक्षण के समय वह सही तरीके से खुला कैसे? लेखक एर्नेस्ट बावेन रोलेंड्स ने अपनी किताब में दावा किया कि फांसी के तख्ते के नीचे एक दूसरा कैदी छिपा हुआ था, जो लीवर खींचते ही लकड़ी फंसा देता था। हालांकि इस थ्योरी का भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला। कुछ इतिहासकार इसे महज संयोग मानते हैं, जबकि कुछ लोगों के लिए यह आज भी एक चमत्कार है।
रहस्य बनकर खत्म हुई जिंदगी
जेल से रिहा होने के बाद जॉन ली ने शादी की और उसके दो बच्चे हुए। बाद में वह अपनी पत्नी को छोड़कर अमेरिका चला गया। इसके बाद उसकी जिंदगी धुंध में खो गई। कई रिकॉर्ड्स के अनुसार, उसकी मौत 1945 में अमेरिका में हुई। लेकिन उसकी कहानी आज भी इतिहास की सबसे रहस्यमयी घटनाओं में गिनी जाती है। क्योंकि दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे हुए हैं, जो मौत के इतने करीब जाकर भी तीन बार जिंदा लौट


