गाड़ी का चालान होना कोई नई बात नहीं है कभी न कभी हर किसी के साथ ऐसा होता ही है। फर्क बस इतना है कि अगर चालान मौके पर कटता है, तो वहीं भुगतान करके मामला खत्म हो जाता है। लेकिन जब चालान ऑनलाइन होता है, तो अक्सर लोगों का ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि हर बार मैसेज भी नहीं आता।
फिर अचानक किसी दिन सोशल मीडिया पर लोक अदालत की पोस्ट नजर आ जाती है… और तभी याद आता है “कहीं मेरा भी चालान तो पेंडिंग नहीं?” इसके बाद लोग गूगल पर जाकर अलग-अलग ऑटो वेबसाइट्स के जरिए चालान चेक करने लगते हैं। कई बार तो ये साइट्स खुद ही आपको चालान से जुड़ी जानकारी भेजने लगती हैं।
ये प्लेटफॉर्म आपके सभी चालान दिखाते हैं और साथ में “डिस्काउंट” का ऑफर भी देते हैं। देखने में सब फायदे का लगता है, इसलिए लोग बिना ज्यादा सोचे पेमेंट कर देते हैं। लेकिन असल में यहीं गड़बड़ हो जाती है आप जरूरत से ज्यादा पैसे दे बैठते हैं।
पहले चालान भरने के लिए RTO ऑफिस जाना पड़ता था, लेकिन अब परिवहन विभाग की वेबसाइट और ऐप ने ये काम काफी आसान कर दिया है। इसके अलावा कुछ प्राइवेट ऐप्स और वेबसाइट्स भी यही सुविधा देने का दावा करती हैं। जैसे ही आप इन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी गाड़ी की जानकारी डालते हैं, ये लगातार आपको मैसेज और व्हाट्सऐप के जरिए अपडेट देते रहते हैं। एक लिंक के जरिए पूरा चालान भरने का विकल्प… और ऊपर से भारी छूट का वादा।
लेकिन असल खेल यहां छुपा होता है।
मान लीजिए आपका चालान ₹500 का है… ये प्लेटफॉर्म उसे ₹2700 तक दिखाते हैं, फिर “डिस्काउंट” लगाकर ₹1900 में भरने को कहते हैं। असल में ये जो अतिरिक्त रकम है, उसे “लीगल फीस” या “सर्विस चार्ज” के नाम पर जोड़ा जाता है।
यानि चालान तो भर जाता है, लेकिन आप जरूरत से कहीं ज्यादा भुगतान कर देते हैं। इसी तरह ₹8000 का चालान बढ़कर ₹12000 तक पहुंच सकता है। और ये सिर्फ किसी एक साइट की बात नहीं है कई प्लेटफॉर्म इसी तरीके से काम करते हैं। क्योंकि ये फीस उनके नियमों में शामिल होती है, इसलिए इनके खिलाफ शिकायत करना भी आसान नहीं होता।
इसलिए बेहतर यही है कि चालान चेक करने और भुगतान करने के लिए सिर्फ Parivahan Sewa Portal या mParivahan का ही इस्तेमाल करें। अगर कभी चालान की आखिरी तारीख निकल जाए और ऑनलाइन पेमेंट का ऑप्शन बंद हो जाए, तो सीधे लोक अदालत का सहारा लें। वहां आपको असली राहत मिल सकती है बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के।
और एक जरूरी बात अगर आप चाहते हैं कि चालान से जुड़ी जानकारी समय पर मिले, तो अपनी RC में मोबाइल नंबर अपडेट जरूर रखें। इससे हर अपडेट सीधे आपके फोन पर आएगा। थोड़ी सी सावधानी आपको फालतू के खर्च से बचा सकती है।


