कोरोनावायरस जब से दुनिया में आया है, तब से पूरी तरह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। हर बार जब लगता है कि अब संक्रमण थम जाएगा, तभी इसका कोई नया वेरिएंट या सब-वेरिएंट सामने आ जाता है और केस फिर से बढ़ने लगते हैं। इस समय भी कुछ ऐसा ही हो रहा है, खासकर अमेरिका में जहां मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसकी वजह है ओमिक्रॉन वेरिएंट का नया सब-वेरिएंट BA.3.2।
इस नए सब-वेरिएंट को ‘सिकाडा’ नाम भी दिया गया है। सिकाडा एक ऐसा कीड़ा होता है जो कई सालों तक जमीन के नीचे रहता है और अचानक बाहर निकलता है। ठीक उसी तरह, यह सब-वेरिएंट भी अचानक सामने आया है।
Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, BA.3.2 पहली बार 22 नवंबर 2024 को दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 तक यह कम से कम 23 देशों में फैल चुका है, जिनमें डेनमार्क, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे देश शामिल हैं। अमेरिका में इसका पहला मामला 27 जून 2025 को सामने आया, जब नीदरलैंड से सैन फ्रांसिस्को पहुंचे एक यात्री में इसकी पुष्टि हुई। बाद में यह वायरस वेस्ट वॉटर सैंपल में भी पाया गया।
शुरुआत में अमेरिका में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच इसके सिर्फ तीन केस सामने आए थे, और अच्छी बात यह रही कि सभी मरीज ठीक हो गए। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और यह सब-वेरिएंट अमेरिका के करीब 25 राज्यों तक फैल चुका है।
BA.3.2 में लगभग 70 से 75 जेनेटिक बदलाव पाए गए हैं, जो इसे पहले के वेरिएंट्स से अलग बनाते हैं। यही म्यूटेशन इसे शरीर की इम्यूनिटी से बचने में मदद कर सकते हैं, जिससे दोबारा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
World Health Organization ने फिलहाल BA.3.2 को “Variant Under Monitoring” की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि इस पर नजर रखी जा रही है, लेकिन अभी इसे “Variant of Concern” नहीं माना गया है। यानी फिलहाल इसे ज्यादा खतरनाक नहीं समझा जा रहा।
अगर इसके लक्षणों की बात करें, तो ये काफी हद तक पुराने वेरिएंट्स जैसे ही हैं। हालांकि एक खास लक्षण गले में तेज खराश और चुभन है। इसके अलावा गले में दर्द, नाक बंद होना या बहना, सूखी खांसी, बुखार के साथ ठंड लगना, अत्यधिक थकान, शरीर दर्द, स्वाद या गंध का चले जाना और हल्की सांस की दिक्कत जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं।
गंभीरता की बात करें तो ज्यादातर मामलों में यह हल्का या मध्यम ही पाया गया है। लेकिन बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को खास सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि उनके लिए यह संक्रमण गंभीर हो सकता है।
मौजूदा वैक्सीन इस सब-वेरिएंट को पूरी तरह रोक नहीं पाती, लेकिन यह बीमारी को गंभीर होने से काफी हद तक बचाती है। साथ ही अस्पताल में भर्ती होने और मौत के खतरे को भी कम करती है। इसलिए वैक्सीनेशन और बूस्टर डोज लेना अब भी बेहद जरूरी है।
भारत में अभी तक BA.3.2 का कोई मामला सामने नहीं आया है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि कोरोना संक्रमण में दूरी कोई मायने नहीं रखती।
बचाव के लिए जरूरी है कि आप भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें, सामाजिक दूरी बनाए रखें और समय-समय पर हाथ साफ करते रहें। अगर आपको किसी भी तरह के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत खुद को अलग कर लें, मास्क पहनें और RT-PCR टेस्ट कराएं। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज शुरू करें।


