बार-बार उबकाई या जी मिचलाना आम तौर पर लोग गैस, एसिडिटी, अपच या पेट के संक्रमण से जोड़कर देखते हैं। कभी-कभी तनाव, माइग्रेन या कुछ दवाओं के असर से भी ऐसा हो सकता है। लेकिन अगर दिनभर सुबह, दोपहर, शाम लगातार मितली बनी रहे, तो यह केवल पेट की समस्या नहीं भी हो सकती। कई मामलों में इसका संबंध किडनी से जुड़ी गड़बड़ी से भी होता है।
जब किडनियां ठीक से काम नहीं कर पातीं, तो शरीर से अपशिष्ट पदार्थ सही तरह बाहर नहीं निकलते और खून में जमा होने लगते हैं। किडनियां दरअसल शरीर को साफ रखने वाली प्राकृतिक फिल्टर होती हैं। इनके कमजोर पड़ने पर यह “गंदगी” शरीर में घूमती रहती है, जिसका असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। इसी वजह से बार-बार जी मिचलाना, उल्टी जैसा महसूस होना या पेट में बेचैनी होने लगती है।
इसके अलावा, किडनी की खराबी से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (जरूरी मिनरल्स) का संतुलन बिगड़ जाता है। ये मिनरल्स शरीर के कई जरूरी कामों को नियंत्रित करते हैं। असंतुलन होने पर शरीर की सामान्य प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। धीरे-धीरे जमा हुए टॉक्सिन पेट की अंदरूनी परत और दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं, जो उल्टी की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इसलिए किडनी की समस्या में लगातार मितली, उल्टी जैसा मन और बेचैनी महसूस हो सकती है।
डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
अगर सामान्य दवाओं के बाद भी उबकाई बंद न हो और इसके साथ चेहरे, हाथ या पैरों में सूजन दिखे, पेशाब कम हो जाए, पेशाब में झाग या खून नजर आए, लगातार थकान बनी रहे, भूख कम लगे या मुंह का स्वाद बदल जाए तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कमर के निचले हिस्से या बाजू में दर्द, बुखार, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना या भ्रम जैसी स्थिति भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।
कौन-से टेस्ट करवाए जा सकते हैं?
ऐसे लक्षण दिखने पर देर न करें और जांच कराएं। सामान्य ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट से किडनी की कार्यक्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है और यह भी पता चल जाता है कि शरीर में अपशिष्ट पदार्थ बढ़ तो नहीं रहे।
किन लोगों में जोखिम ज्यादा होता है?
जिन लोगों को डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर है, उन्हें किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है। पहले किडनी स्टोन हो चुका हो, बार-बार संक्रमण होता हो या परिवार में किडनी रोग का इतिहास हो तो भी सावधानी जरूरी है। इसके अलावा मोटापा, दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन, कम पानी पीना और धूम्रपान जैसी आदतें भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए जीवनशैली पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।


