दिल्ली के दक्षिणी भाग में स्थित कालकाजी मंदिर देश के सबसे प्राचीन और सिद्धपीठों में से एक माना जाता है। ‘कालका’ दरअसल देवी काली का ही एक स्वरूप है। इस मंदिर को जयंती पीठ और मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसका अस्तित्व अनादि काल से है और यह मंदिर मां काली को समर्पित है, जिन्होंने असुरों के विनाश के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। कहा जाता है कि वर्तमान मंदिर की स्थापना बाबा बालकनाथ ने की थी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर आदि शक्ति माता भगवती महाकाली के रूप में प्रकट हुई थीं। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया था और यहां देवी स्वयं विराजमान हैं। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक अलग आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो भक्तों को देवी के साक्षात सान्निध्य का अहसास कराती है।
मंदिर की एक खास विशेषता इसके 12 द्वार हैं, जो 12 महीनों और 12 राशियों का प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि अपनी राशि के अनुसार द्वार से प्रवेश करने पर कुंडली से जुड़े दोषों में राहत मिलती है। हर द्वार के पास देवी के अलग-अलग स्वरूपों के चित्र भी बनाए गए हैं, जो भक्तों की आस्था को और गहरा करते हैं।
एक और विशेष बात यह है कि ग्रहण के दिन, जब अधिकतर मंदिर बंद रहते हैं, तब भी यह मंदिर खुला रहता है। ऐसा माना जाता है कि उस समय सभी ग्रह मां कालिका के अधीन होते हैं। यहां नियमित दिनों में वेद, पुराण और तांत्रिक विधियों के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। इन नौ दिनों में माता का प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार से श्रृंगार किया जाता है—कभी मखाने, कभी ड्राई फ्रूट्स तो कभी दुर्लभ फूलों से। साथ ही विशेष भोग भी अर्पित किया जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
दर्शन और आरती का समय:
सुबह:
गणेश वंदना: सुबह 5 बजे
श्रृंगार (मंदिर बंद): 5:30 से 6:30 बजे
सुबह की आरती: 6:30 से 7 बजे
भोग: दोपहर 12 बजे (11:45 से 12:15 तक मंदिर बंद)
सफाई के लिए बंद: 3 से 4 बजे
शाम:
गणेश वंदना: शाम 7 बजे
श्रृंगार (मंदिर बंद): 7:30 से 8:30 बजे
शाम की आरती: 8:30 से 9 बजे
सज्जा: रात 11:30 बजे
मंदिर बंद: 11:30 बजे से सुबह 4 बजे तक
कैसे पहुंचें:
कालकाजी मंदिर तक पहुंचना बेहद आसान है। दिल्ली मेट्रो की वायलेट लाइन पर स्थित कालकाजी मंदिर स्टेशन से बाहर निकलते ही मंदिर कुछ ही दूरी पर स्थित है। इसके अलावा, DTC की कई बसें भी यहां तक सीधी पहुंच प्रदान करती हैं। कैब या ऑटो के माध्यम से भी आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 15 किलोमीटर है, जबकि कश्मीरी गेट बस अड्डे से यह करीब 20 किलोमीटर दूर है।


