देश में पहला AI आधारित हेल्थकेयर सिस्टम लॉन्च किया गया है, जिसका नाम iLive Connect है। यह एक ऐसा डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मरीजों की सेहत पर चौबीसों घंटे नज़र रखता है। इसे दुनिया का पहला डॉक्टर-लेड, AI-सपोर्टेड डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है, जो अस्पताल से बाहर भी मरीज की निगरानी को संभव बनाता है।
आमतौर पर जब तक मरीज अस्पताल में भर्ती रहता है, तब तक उसकी देखभाल डॉक्टरों और नर्सों द्वारा लगातार की जाती है। लेकिन जैसे ही मरीज को डिस्चार्ज किया जाता है, उसके बाद उसकी सेहत पर नज़र रखना मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या को हल करने के लिए iLive Connect को तैयार किया गया है, ताकि मरीज अस्पताल से बाहर रहते हुए भी मेडिकल निगरानी में बना रहे।
इस सिस्टम के तहत मरीज को दो डिवाइस दी जाती हैं। पहली बायोसेंसर पैच होती है, जिसे छाती पर ECG पैच की तरह लगाया जाता है। दूसरी एक रिस्टबैंड होती है, जिसे कलाई पर पहना जाता है और यह दिखने में स्मार्टवॉच जैसी होती है। इन दोनों डिवाइसेज़ को लगातार पहनना होता है, लेकिन ये पूरी तरह वॉटरप्रूफ होती हैं, इसलिए नहाते समय या रोज़मर्रा के कामों में इन्हें पहनने में कोई परेशानी नहीं होती।
बायोसेंसर पैच और रिस्टबैंड मरीज की सेहत से जुड़ा डेटा लगातार रिकॉर्ड करते हैं। इसमें दिल की धड़कन, सांस लेने की गति, ऑक्सीजन लेवल, शरीर का तापमान, ब्लड प्रेशर में बदलाव, फिजिकल एक्टिविटी, पोश्चर, नींद की क्वालिटी और पैटर्न, थकान का स्तर और यहां तक कि मरीज के गिरने की स्थिति तक का पता लगाया जा सकता है।
यह सारा डेटा रियल टाइम में iLive Connect के कमांड सेंटर तक पहुंचता है। वहां मौजूद स्पेशलाइज्ड मेडिकल टीम दिन-रात मरीज की सेहत को लाइव मॉनिटर करती रहती है। किसी भी समय अगर मरीज के हेल्थ पैरामीटर्स में असामान्य बदलाव दिखाई देते हैं, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।
अगर मरीज की तबीयत बिगड़ती है, जैसे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाना, शुगर लेवल का बहुत ज्यादा या कम हो जाना, या सांस लेने में परेशानी, तो कमांड सेंटर की मेडिकल टीम तुरंत मरीज और उसके गार्डियन से संपर्क करती है। गार्डियन परिवार का कोई भी सदस्य हो सकता है। उन्हें तुरंत ज़रूरी सलाह दी जाती है और बताया जाता है कि उस समय क्या कदम उठाने चाहिए।
iLive Connect का एक मोबाइल ऐप भी है, जिसके ज़रिए मरीज को तुरंत ई-प्रिस्क्रिप्शन भेज दिया जाता है। इस प्लेटफॉर्म से जुड़ी फार्मेसी के माध्यम से दवाइयां आमतौर पर एक घंटे के भीतर मरीज तक पहुंचा दी जाती हैं। इससे इमरजेंसी स्थिति में समय की बचत होती है।
अगर मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो जाती है और उसे अस्पताल ले जाने की ज़रूरत पड़ती है, तो कमांड सेंटर से तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। इसके बाद लगभग 20 मिनट के भीतर एंबुलेंस मरीज के पास पहुंचती है और उसे नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।
इन सभी सुविधाओं का लाभ सब्सक्रिप्शन मॉडल के ज़रिए मिलता है। 14 दिन का सब्सक्रिप्शन लगभग 17,100 रुपये का है, जिसमें डिवाइसेज़ की कीमत शामिल होती है। एक महीने का सब्सक्रिप्शन करीब 27,000 रुपये का बताया गया है। इसके बाद लंबे समय के प्लान, जैसे 3 महीने, 6 महीने या एक साल के सब्सक्रिप्शन, अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं और बार-बार नई डिवाइस लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
यह प्लेटफॉर्म खासतौर पर बुज़ुर्गों, अकेले रहने वाले लोगों, हाल ही में अस्पताल से डिस्चार्ज हुए मरीजों और लंबे समय से डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, COPD या अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है।
iLive Connect की डिवाइसेज़ को करीब 410 मरीजों पर टेस्ट किया गया, जो लगभग 10 हफ्तों तक चला। इस अध्ययन में सामने आया कि इस सिस्टम के इस्तेमाल से बार-बार अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में करीब 76 प्रतिशत तक की कमी देखी गई।
कुल मिलाकर, iLive Connect हेल्थकेयर मॉनिटरिंग के तरीके को बदलने की क्षमता रखता है। हालांकि फिलहाल इसकी कीमत आम लोगों के लिए थोड़ी ज्यादा मानी जा रही है, लेकिन उम्मीद है कि भविष्य में यह तकनीक और अधिक सुलभ होगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकेंगे।


