भारत में लगभग 22 करोड़ से ज्यादा लोग हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोग लो बीपी, जिसे हाइपोटेंशन कहा जाता है, की समस्या से भी जूझ रहे हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो ब्लड प्रेशर देश की एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है।
फिर भी एक बड़ी आबादी बीपी की दवाइयां शुरू करने से कतराती है। लोगों को डर रहता है कि अगर एक बार दवा शुरू कर दी, तो जिंदगीभर लेनी पड़ेगी और इससे किडनियां खराब हो सकती हैं।
लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्लड प्रेशर की दवाइयां किडनियों को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। लंबे समय तक हाई बीपी रहने से शरीर के कई अहम अंग प्रभावित होते हैं—जैसे दिल, दिमाग और किडनियां। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी की बारीक रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे धीरे-धीरे उनकी खून को फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है। गंभीर मामलों में किडनी फेल होने तक की नौबत आ सकती है। इसलिए बीपी को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है, और इसमें दवाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए कई तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ दवाओं की शुरुआत के बाद क्रिएटिनिन का स्तर थोड़ा बढ़ सकता है। क्रिएटिनिन शरीर में बनने वाला एक वेस्ट प्रोडक्ट है, जिसे सामान्यतः किडनी फिल्टर कर यूरिन के जरिए बाहर निकाल देती है। जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तब यह शरीर में जमा हो सकता है। हालांकि, दवा शुरू करने के बाद क्रिएटिनिन में हल्की वृद्धि अक्सर अस्थायी होती है और घबराने की जरूरत नहीं होती।
रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि बीपी की दवाइयां शुरू करने के बाद समय-समय पर किडनी फंक्शन की जांच की जाती है, ताकि किसी भी बदलाव पर नजर रखी जा सके। यदि सभी रिपोर्ट सामान्य दायरे में रहती हैं, तो दवाइयां जारी रखी जाती हैं।
कुछ मामलों में दवा लेने के बाद ब्लड प्रेशर जरूरत से ज्यादा कम हो सकता है। ऐसी स्थिति में चक्कर आना, घबराहट या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए दवा शुरू करने के शुरुआती दिनों में दिन में 2-3 बार ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना जरूरी माना जाता है। यदि रीडिंग बार-बार सामान्य से कम आए, तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। जरूरत पड़ने पर दवा की खुराक कम की जा सकती है या उसे बदला भी जा सकता है।
सार यह है कि बीपी की दवाइयों से डरने के बजाय सही जानकारी और नियमित जांच के साथ इलाज जारी रखना ही बेहतर विकल्प है।
Article Disclaimer : यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी दवा या उपचार से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।


