फ़ैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर पर जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। आज के समय में यह समस्या दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में इसके मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। पहले लोग मानते थे कि यह बीमारी सिर्फ शराब पीने वालों या ज्यादा तला-भुना खाने वालों को होती है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मोटापा, डायबिटीज़, खराब खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इसके बड़े कारण बन चुके हैं।
अब फ़ैटी लिवर को एक लाइफस्टाइल डिजीज माना जाता है। इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है, क्योंकि समय पर ध्यान न देने पर लिवर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। गंभीर स्थिति में यह लिवर फेलियर तक पहुंच सकता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि फ़ैटी लिवर के शुरुआती संकेत क्या हैं, इसकी पहचान कैसे होती है और इसका इलाज क्या है।
फ़ैटी लिवर की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार मरीज को तब तक पता नहीं चलता, जब तक लिवर को काफी नुकसान न हो जाए। अक्सर इसका पता तब चलता है, जब किसी दूसरी समस्या के कारण अल्ट्रासाउंड या स्कैन कराया जाता है। जैसे पेट दर्द, गैस, या किसी इंफेक्शन की जांच के दौरान यह सामने आता है।
फ़ैटी लिवर की जांच के लिए सबसे आसान और सामान्य टेस्ट अल्ट्रासाउंड है। इससे यह पता चल जाता है कि लिवर में फैट जमा है या नहीं। अगर रिपोर्ट में फ़ैटी लिवर आता है, तो डॉक्टर कुछ और जांचें भी सलाह दे सकते हैं। जैसे ब्लड शुगर टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड टेस्ट और BMI चेक करना। ये सभी जांचें यह समझने में मदद करती हैं कि बीमारी कितनी गंभीर है और किन कारणों से हुई है।
अगर अल्ट्रासाउंड में फ़ैटी लिवर दिखता है, तो कई मामलों में फाइब्रोस्कैन भी कराया जाता है। यह टेस्ट बताता है कि लिवर पर कितना असर पड़ा है और कहीं उसमें सख्ती या डैमेज तो नहीं हो रहा। जरूरत पड़ने पर CT Scan, MRI या दूसरी एडवांस जांचें भी कराई जा सकती हैं।
फ़ैटी लिवर को आमतौर पर तीन ग्रेड में बांटा जाता है। ग्रेड 1 शुरुआती स्टेज होती है, जिसमें हल्का फैट जमा होता है। ग्रेड 2 में फैट की मात्रा बढ़ जाती है और ग्रेड 3 में स्थिति ज्यादा गंभीर मानी जाती है। शुरुआत में नुकसान कम होता है, लेकिन अगर इसके साथ मोटापा, डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल या शराब पीने की आदत हो, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
फ़ैटी लिवर सिर्फ लिवर की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर की दूसरी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। जिन लोगों को फ़ैटी लिवर होता है, उनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए इसका समय पर इलाज जरूरी है।
अच्छी बात यह है कि फ़ैटी लिवर का इलाज ज्यादातर मामलों में लाइफस्टाइल बदलकर किया जा सकता है। अगर आप मीठा कम करें, तला-भुना खाना कम करें, सफेद चावल और मैदा सीमित करें, ज्यादा सब्जियां और फाइबर लें, तो फायदा होता है। साथ ही रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करना बेहद जरूरी है। शराब पीते हैं तो उसे तुरंत बंद करना चाहिए।
जब फ़ैटी लिवर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जैसे भूख कम लगना, उल्टी जैसा महसूस होना, पेट के दाईं तरफ दर्द, कमजोरी या थकान महसूस होना। लेकिन कई बार तब तक बीमारी गंभीर हो चुकी होती है। इसलिए बेहतर यही है कि समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराते रहें और अपने खान-पान व लाइफस्टाइल पर ध्यान दें। सही समय पर पहचान होने से फ़ैटी लिवर को कंट्रोल किया जा सकता है।


