कैंसर क्यों होता है, इसकी कोई एक निश्चित वजह आज तक सामने नहीं आई है। लेकिन मेडिकल रिसर्च यह इशारा जरूर करती है कि कुछ आदतें और जीवनशैली कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इन्हीं में से एक है अत्यधिक तीखा और मसालेदार भोजन। अक्सर कहा जाता है कि बहुत ज़्यादा मिर्च-मसाले वाला खाना नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे पेट में जलन, सूजन और आगे चलकर कैंसर का ख़तरा बढ़ सकता है। अब सवाल यह है—क्या वाकई मसालेदार खाना पेट का कैंसर कर सकता है?
रिसर्च बताती है—कभी-कभार नहीं, लेकिन लगातार तीखा खाना बढ़ा सकता है खतरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, कभी-कभार मसालेदार और तीखा भोजन खाना नुकसानदायक नहीं होता। लेकिन अगर कोई व्यक्ति रोज़ या हफ्ते में कई बार अत्यधिक तीखा खाना खाता है, तो इससे पेट की भीतरी परत पर असर पड़ने लगता है। बार-बार तीखा भोजन पेट में इनफ्लेमेशन (सूजन) पैदा कर सकता है। धीरे-धीरे अल्सर बनने का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक बनी ये सूजन पेट की कोशिकाओं में बदलाव ला सकती है, जिससे आगे चलकर कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन नामक तत्व थोड़ी मात्रा में नुकसानदायक नहीं होता। यहां तक कि यह हल्की सूजन कम भी कर सकता है। लेकिन जब यही कैप्साइसिन बड़ी मात्रा में और लगातार खाया जाए, तो यह गैस्ट्रिक म्यूकोसा यानी पेट की भीतरी परत को नुकसान पहुंचाने लगता है।
इसके कारण:
पेट में एसिड बढ़ता है
परत पर जलन होती है
अल्सर बनने की संभावना बढ़ जाती है
रिसर्च के अनुसार, ऐसी स्थिति कई सालों तक चलने पर कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
किन लोगों में जोखिम और बढ़ जाता है?
रिपोर्ट्स कहती हैं कि ये जोखिम उन लोगों में और बढ़ जाता है, जिन्हें:
H. pylori (हेलिकोबैक्टर पाइलोरी) का संक्रमण हो
लंबे समय से स्मोकिंग या शराब की आदत हो
अक्सर पेनकिलर लेनी पड़ती हों
परिवार में किसी को पेट का कैंसर हुआ हो
क्रोनिक गैस्ट्राइटिस या पेप्टिक अल्सर की समस्या हो
10–15 साल तक लगातार अधिक मसालेदार भोजन करने वाले लोगों में पेट के कैंसर का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में ज़्यादा देखा गया है।
पेट के कैंसर के प्रमुख लक्षण
शुरुआत में पेट के कैंसर के लक्षण बहुत हल्के या न के बराबर होते हैं। लेकिन समय के साथ ये संकेत दिखाई देने लगते हैं:
पेट में भारीपन
थोड़ी सी खाने पर पेट भर जाने जैसा महसूस होना
भूख कम लगना
वज़न तेजी से घटना
पेट दर्द
लगातार उल्टी
खून की उल्टी आना
काला रंग का स्टूल
निगलने में दिक्कत
थकान, कमजोरी और एनीमिया
अक्सर लोग इन्हें गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज़ कर देते हैं, जिससे कैंसर का पता देर से चलता है।
जांच कैसे होती है?
पेट में कैंसर की पुष्टि के लिए आमतौर पर की जाती हैं:
एंडोस्कोपी
बायोप्सी
CT स्कैन / PET स्कैन
इलाज किस तरह होता है?
कैंसर की स्टेज के आधार पर इलाज तय होता है:
शुरुआती स्टेज में सर्जरी
आगे बढ़े मामलों में कीमोथेरेपी
रेडिएशन थेरेपी
टारगेटेड ड्रग थेरेपी
तीखा खाना सीधे कैंसर नहीं करता, लेकिन… रिसर्च का स्पष्ट कहना है कि: कभी-कभार तीखा भोजन हानिकारक नहीं, लगातार और अत्यधिक मात्रा में मसालेदार खाना, पेट में क्रोनिक सूजन और अल्सर पैदा कर सकता है. यही लंबे समय तक बने रहने पर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है. इसलिए बेहतर है कि मसालेदार खाना सीमित मात्रा में खाएं और पेट से जुड़े लक्षणों को हल्के में न लें।
इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मेडिकल रिसर्च और विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों पर आधारित है। यह सामग्री केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे किसी भी प्रकार की मेडिकल सलाह, डायग्नोसिस या इलाज का विकल्प न माना जाए। यदि आपको पेट दर्द, उल्टी, अल्सर, गैस्ट्रिक समस्या या कैंसर से जुड़े कोई भी लक्षण महसूस हों, तो तुरंत किसी योग्य गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करें। अपने आहार या उपचार से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


