हमारा शरीर लगातार काम करता रहता है और इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है – खून का सही तरीके से बहना। जब तक शरीर के हर हिस्से तक पर्याप्त मात्रा में खून पहुंचता रहता है, तब तक अंग सही तरीके से अपना काम करते रहते हैं। लेकिन जैसे ही किसी हिस्से में खून की सप्लाई कम होने लगती है, वहां समस्याएं शुरू हो सकती हैं और धीरे-धीरे उस अंग की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।
इसे एक साधारण उदाहरण से समझा जा सकता है।
जैसे कोई गाड़ी तब तक तेज़ी से चलती रहती है जब तक उसमें फ्यूल होता है। जैसे ही फ्यूल खत्म हो जाता है, गाड़ी रुक जाती है। फर्क बस इतना है कि गाड़ी में दोबारा फ्यूल डालकर उसे चलाया जा सकता है, लेकिन शरीर में अगर किसी अंग को लंबे समय तक सही खून न मिले, तो नुकसान स्थायी भी हो सकता है।
दरअसल शरीर में खून के बहाव का एक पूरा नेटवर्क होता है। इसमें आर्टरीज़ यानी धमनियां और वेन्स यानी शिराएं शामिल होती हैं। धमनियां दिल से ऑक्सीजन वाला खून शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाती हैं, जबकि शिराएं वही खून वापस दिल तक लेकर आती हैं।
इन दोनों में अलग-अलग तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
अगर शिराओं की बात करें तो उनमें सबसे आम समस्या होती है नसों का फूल जाना। जब नसें फैलने लगती हैं तो खून का बहाव सामान्य तरीके से वापस दिल तक नहीं पहुंच पाता और नसों के अंदर ही जमा होने लगता है। ऐसी स्थिति में पैरों की नसें उभरी हुई और टेढ़ी-मेढ़ी दिखाई देने लगती हैं, जिसे आम तौर पर वैरिकोज़ वेन्स कहा जाता है।
कभी-कभी नसों के भीतर खून का थक्का भी बन सकता है। यह थक्का अगर वहीं अटका रहे तो उस हिस्से को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन अगर यह टूटकर शरीर के ऊपरी हिस्सों तक पहुंच जाए तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
अब बात करते हैं धमनियों की।
धमनियां दिल से दबाव के साथ खून को शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाती हैं। सामान्य स्थिति में इनकी अंदरूनी सतह चिकनी और लचीली होती है, जिससे खून आसानी से बहता रहता है। लेकिन समय के साथ-साथ कुछ आदतें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं इनकी बनावट को प्रभावित कर सकती हैं।
उम्र बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और डायबिटीज़ जैसी स्थितियों के कारण धमनियों की अंदरूनी परत सख्त और खुरदरी होने लगती है। ऐसे में खून का प्रवाह धीमा पड़ सकता है और कुछ जगहों पर थक्का बनने की संभावना भी बढ़ जाती है। जहां-जहां खून का बहाव रुकने लगता है, वहां उस अंग को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है।
शरीर का जो भी हिस्सा खून की कमी से प्रभावित होगा, उसी से जुड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं।
अगर आंखों तक खून की सप्लाई कम हो जाए तो नजर कमजोर होने लगती है।
दिमाग में खून का प्रवाह बाधित हो जाए तो लकवे जैसी समस्या हो सकती है।
दिल तक खून सही मात्रा में न पहुंचे तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
आंतों में खून की कमी से पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है।
किडनी तक खून का प्रवाह रुक जाए तो किडनी के काम पर असर पड़ सकता है।
इसी तरह हाथ और पैरों में भी गंभीर नुकसान हो सकता है।
अब सवाल ये उठता है कि आखिर ब्लड सर्कुलेशन खराब क्यों होता है?
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
जैसे धूम्रपान की आदत, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी की कमी और लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि का अभाव। इन वजहों से धीरे-धीरे धमनियों और नसों पर असर पड़ता है और खून का प्रवाह प्रभावित होने लगता है।
खराब ब्लड सर्कुलेशन के शुरुआती संकेत अक्सर पैरों में दिखाई देते हैं।
अगर पैरों में लगातार दर्द रहने लगे…
या सूजन आने लगे…
मोज़े पहनने के बाद पैरों पर गहरे निशान पड़ने लगें…
पैरों में झनझनाहट महसूस हो…
या पैरों का रंग बदलने लगे…
तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे संकेत इस बात की ओर इशारा कर सकते हैं कि शरीर में खून का प्रवाह सामान्य नहीं है।
अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या बढ़कर पैरों को नुकसान पहुंचा सकती है और गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकती है। इसलिए बेहतर यही है कि शुरुआत में ही सावधानी बरती जाए।
अब बात करते हैं कि ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर कैसे रखा जा सकता है।
सबसे पहली बात यह है कि ऐसी आदतें अपनाई जाएं जो खून के बहाव को प्रभावित ही न होने दें।
इसके लिए जरूरी है कि ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखा जाए।
ब्लड प्रेशर को संतुलित रखा जाए।
रोजाना कुछ समय के लिए शारीरिक गतिविधि या एक्सरसाइज़ की जाए।
इसके अलावा शरीर में पानी की कमी न होने दें।
संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड कम से कम खाएं।
डीप फ्राई चीजों का सेवन सीमित रखें।
और रोजाना खाने में सब्जियां और फल जरूर शामिल करें।
कुल मिलाकर, अगर शरीर में खून का प्रवाह सही रखना है तो स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नियमित गतिविधि इस दिशा में सबसे बड़े कदम हो सकते हैं।
और अगर कभी शरीर में खराब ब्लड सर्कुलेशन के संकेत दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते ध्यान देना सबसे समझदारी भरा कदम होगा।
अस्वीकरण:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण की स्थिति में योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।


