मुंबई के प्रतिष्ठित ऑल-बॉयज़ कैंपियन स्कूल में फ़ुटबॉल खेलने वाला, राजनीतिक विरासत में पला-बढ़ा एक लड़का—पार्थ पवार—हमेशा मानता था कि राजनीति में कदम रखते ही ज़िंदगी की आज़ादी सिमट जाती है। इसलिए उसने तय किया कि राजनीति में आने से पहले जीवन को पूरी तरह जीना चाहिए। इसी सोच के साथ वह लंदन के Regent’s University में बिजनेस स्टडीज़ के लिए गया।
लेकिन वहाँ की ज़िंदगी उतनी आसान नहीं थी। पिता अजित पवार से मिलने वाले सीमित पैसों के बीच एक ‘गुमनाम’ साधारण छात्र की तरह जीना उसके लिए मुश्किल साबित हुआ। बचपन से सिक्योरिटी एस्कॉर्ट्स, वीआईपी दर्जा, और सत्ता के रसूख के माहौल में पला यह लड़का जब आम जीवन में उतरा, तो उसे समझ आया कि विशेषाधिकारों की आदत आसानी से नहीं छूटती। दो साल बाद वह मुंबई लौट आया और मुंबई यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। इसी दौरान राजनीति में उसकी रूचि तीव्र होती गई।
चुनावी शुरुआत और हार जिसने सब बदल दिया
साल 2019 में पार्थ ने अपने दादा शरद पवार की इच्छा के विपरीत जाकर मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। यहां उन्हें करीब दो लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा। यह पवार परिवार का पहला सदस्य था जिसे चुनाव में हार मिली। यह हार पार्थ की राजनीतिक यात्रा का टर्निंग पॉइंट बन गई। हार के बाद पार्थ कई बार परिवार की स्थापित राजनीतिक लाइन से हटकर बयान देते दिखे। जहाँ शरद पवार ने राम मंदिर शिलान्यास पर सवाल उठाए, वहीं पार्थ ने इसे “ऐतिहासिक क्षण” बताया। सुशांत सिंह राजपूत केस में जहाँ उस समय की महाराष्ट्र सरकार CBI जांच के खिलाफ थी, वहीं पार्थ ने ट्वीट किया—“Satyamev Jayate”। उनके इन कदमों ने उन्हें ‘बागी और स्वतंत्र रुख’ वाले राजनेता के रूप में स्थापित कर दिया।
विवादों की परछाई
राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच पार्थ कई विवादों में घिरे। हाल ही में उनका नाम Amedia Holdings LLP से जुड़ा, जिस पर आरोप है कि उसने पुणे की लगभग ₹1800 करोड़ की जमीन को सिर्फ ₹300 करोड़ में खरीदा और उस पर सिर्फ ₹500 की स्टाम्प ड्यूटी भरकर रजिस्ट्री कराई। इससे पहले भी उनकी गैंगस्टर गजानन मरने के साथ तस्वीर वायरल होने पर सवाल उठे थे।
विवादों से इतर, पार्थ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। उन्होंने Parth Pawar Foundation (PPF) की स्थापना की है, जो ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
संपत्ति और देनदारियाँ
2019 के चुनावी हलफ़नामे के अनुसार:
पार्थ के पास पुणे के भोसलानगर में लगभग ₹13.16 करोड़ कीमत का ‘जिजाई बंगला’ है।
उनके नाम ₹3.69 करोड़ की चल संपत्ति और ₹16.42 करोड़ की अचल संपत्ति है।
उन पर ₹9.36 करोड़ का लोन भी दर्ज है, जिसमें:
₹7.13 करोड़ मां सुनेत्रा पवार से
और ₹2.23 करोड़ भाई जय पवार से लिया गया है।
एनसीपी के विभाजन के बाद पार्थ अपने पिता अजित पवार के साथ हैं। हालाँकि वे चुनावी मंच पर कम दिखते हैं, पर युवा विंग की रणनीति, संगठन विस्तार और ‘पर्दे के पीछे की राजनीति’ में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पार्थ पवार की राजनीतिक यात्रा अभी भी अपने आकार लेने की प्रक्रिया में है। उनकी छवि—‘परिवार की लाइन से हटकर चलने वाले युवा नेता’ की—उन्हें रोचक और विवादित दोनों बनाती है।


