मेरठ में एक 22 वर्षीय युवक मोबाइल पर गेम खेल रहा था। खेलते-खेलते अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए उसे अस्पताल पहुंचाया। जांच में पता चला कि उसका ब्लड प्रेशर बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका था—मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसका बीपी 300 के पार बताया गया। तेज़ी से बढ़े रक्तचाप की वजह से उसके दिमाग की एक नस फट गई, जिससे ब्रेन हेमरेज हो गया। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के Safdarjung Hospital में भर्ती कराया गया, जहां 8 फरवरी को उसकी मौत हो गई।
युवक का नाम मोहम्मद कैफ था और वह मेरठ के खैरनगर इलाके का निवासी था। परिवार के अनुसार उसे पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी और वह दवाइयां भी ले रहा था। परिजनों का कहना है कि वह काफी समय मोबाइल पर बिताता था और सोशल मीडिया के लिए रील्स भी बनाता था। घरवालों ने कई बार उसे फोन कम इस्तेमाल करने की सलाह दी, लेकिन उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
भारत में हाई ब्लड प्रेशर एक आम लेकिन बेहद खतरनाक बीमारी बन चुका है। इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों लोग हाई बीपी से जूझ रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों का ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। बड़ी संख्या में लोग नियमित जांच तक नहीं कराते। Indian Council of Medical Research और National Centre for Disease Informatics and Research की एक स्टडी, जो International Journal of Public Health में प्रकाशित हुई थी, बताती है कि हर 10 में से 3 भारतीय जीवन में कभी भी अपना ब्लड प्रेशर चेक नहीं कराते।
नतीजा यह होता है कि हाई बीपी बिना शोर किए शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचाता रहता है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल और दिमाग तक जाने वाली नसों पर लगातार दबाव डालता है। इससे नसों की दीवारें कमजोर हो जाती हैं। यदि किसी समय अचानक ब्लड प्रेशर और ज्यादा बढ़ जाए—जैसे तेज़ गुस्सा, तनाव, भारी शारीरिक मेहनत या दवा छूट जाने पर—तो कमजोर पड़ी नस फट सकती है। नस फटते ही दिमाग में खून भर जाता है और ब्रेन हेमरेज की स्थिति बन जाती है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और समय पर इलाज न मिले तो जानलेवा साबित हो सकती है।
ऐसे में जिन लोगों को हाई बीपी की समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ज्यादा नमक और तली-भुनी चीज़ों से दूरी रखें। रोजाना हल्की-फुल्की कसरत करें, लेकिन अचानक अत्यधिक मेहनत से बचें। धूम्रपान और शराब का सेवन न करें। तनाव कम रखने की कोशिश करें और पर्याप्त नींद लें। सबसे महत्वपूर्ण बात—डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां नियमित रूप से समय पर लें और समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच जरूर कराते रहें। यदि रीडिंग लगातार ज्यादा आए, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।


