मीज़ल्स, जिसे खसरा भी कहा जाता है, एक ऐसी बीमारी है जो ज़्यादातर बच्चों में पाई जाती है। इस बीमारी में शरीर पर लाल रंग के चकत्ते उभर आते हैं, तेज़ बुखार होता है, सर्दी-ज़ुकाम रहता है और कई मामलों में डायरिया भी हो सकता है।
बीते कुछ वर्षों में दुनिया भर में मीज़ल्स के मामले काफी कम हो गए थे, लेकिन अब एक बार फिर इस बीमारी के मामले बढ़ते दिख रहे हैं। अमेरिका और मैक्सिको जैसे देशों में, जहां लंबे समय से मीज़ल्स का कोई मामला सामने नहीं आया था, वहां भी अब नए केस दर्ज किए जा रहे हैं।
भारत में भी मीज़ल्स के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। साल 2022 में देश में करीब 32 हज़ार सस्पेक्टेड और कन्फर्म्ड मीज़ल्स के केस सामने आए। महाराष्ट्र, केरल, झारखंड और गुजरात ऐसे राज्य रहे जहां सबसे ज़्यादा मामले दर्ज हुए। मुंबई में खसरे के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी। इसकी एक बड़ी वजह है घनी आबादी और कम जगह में ज़्यादा लोगों का रहना, जिससे संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेज़ी से फैलता है।
कोविड काल के दौरान लगभग 30 लाख बच्चों को मीज़ल्स की वैक्सीन नहीं लग पाई। इन्हीं वजहों के चलते, जो बीमारी लगभग खत्म मानी जा रही थी, वह एक बार फिर फैलने लगी है।
मीज़ल्स एक पुरानी लेकिन बेहद संक्रामक बीमारी है। यह एक वायरल इन्फेक्शन है जो बहुत आसानी से फैलता है। शुरुआत में खांसी-जुकाम, आंखों से पानी या डिस्चार्ज और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ बच्चों में हालात गंभीर हो सकते हैं और निमोनिया जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
मीज़ल्स बच्चों की इम्यूनिटी को काफी कमजोर कर देता है। इम्यून सिस्टम कमजोर होने की वजह से बच्चों में गंभीर संक्रमण, जैसे फेफड़ों या दिमाग से जुड़ी बीमारियां, हो सकती हैं। यह संक्रमण एक मरीज से दूसरे मरीज में तेजी से फैलता है।
दुनिया भर में मीज़ल्स के दोबारा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह टीकाकरण में आई कमी है। पिछले 10 से 20 सालों में वैक्सीन की वजह से मीज़ल्स के मामले काफी हद तक कम हो गए थे। मीज़ल्स की दो डोज़ लेने के बाद बच्चों को लगभग 99 प्रतिशत तक सुरक्षा मिलती है। लेकिन हाल के वर्षों में वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या घटने से यह बीमारी फिर से फैलने लगी है।
मीज़ल्स से बचाव के लिए सबसे ज़रूरी है समय पर वैक्सीन लगवाना। मीज़ल्स से संक्रमित व्यक्ति को दूसरों से अलग रखना चाहिए, खासतौर पर छोटे बच्चों से। बीमारी के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें और ज़रूरत पड़ने पर इलाज करवाएं। एक बार संक्रमण हो जाने के बाद कोई एंटी-वायरल दवा या वैक्सीन असर नहीं करती, इसलिए बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है।
मीज़ल्स से बचाव के लिए दो MMR वैक्सीन लगवाना ज़रूरी होता है, जिसमें मीज़ल्स, मम्प्स और रूबेला से सुरक्षा मिलती है। पहला डोज़ 9 से 12 महीने की उम्र में और दूसरा डोज़ 15 से 18 महीने के बीच दिया जाता है। सही समय पर दोनों डोज़ लेने से मीज़ल्स से लगभग 99 प्रतिशत तक बचाव संभव है।


