ईरान पर अमेरिका और इज़रायल की सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया। जवाब में ईरान ने गुस्से में अपने कई पड़ोसी देशों—यूएई, क़तर और कुवैत—की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। इतना ही नहीं, उसने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही भी रोक दी। यही कदम वैश्विक बाजार के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ, क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की सप्लाई होती है।
जैसे ही इस समुद्री मार्ग पर तेल की आवाजाही रुकने की खबर फैली, उसका असर धीरे-धीरे आम लोगों की जिंदगी तक भी पहुंचने लगा। हमारे ऑफिस के बाहर चाय बेचने वाले नंदू भैया ने अचानक चाय की कीमत 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दी। यानी सीधा 50 प्रतिशत का उछाल। जब उनसे वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि गैस महंगी मिल रही है और सिलेंडर का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है, इसलिए दाम बढ़ाने पड़े।
पहले तो लगा कि यह सिर्फ बहाना होगा, लेकिन थोड़ी देर बाद पता चला कि कई जगहों पर वास्तव में LPG सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो रही है। कुछ लोगों ने तो गैस के विकल्प के तौर पर बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल शुरू करने की तैयारी भी कर ली है।
यहीं से एक बड़ा सवाल सामने आता है—अगर गैस की सप्लाई में दिक्कत हो जाए तो क्या इंडक्शन बेहतर विकल्प हो सकता है? और सबसे अहम बात, रोज़ाना खाना बनाने में आखिर जेब पर कम खर्च किससे पड़ता है—गैस से या बिजली से?
आज भारत के किचन में दो तरह के विचार देखने को मिलते हैं। एक तरफ वे लोग हैं जो पारंपरिक LPG गैस चूल्हे को सबसे भरोसेमंद मानते हैं। दूसरी तरफ वे लोग हैं जो बिजली से चलने वाले इंडक्शन कुकटॉप को तेज, साफ और आधुनिक तकनीक का बेहतर विकल्प बताते हैं। असल में यह बहस सिर्फ पसंद की नहीं है, बल्कि इसके पीछे विज्ञान, ऊर्जा दक्षता और खर्च का पूरा गणित भी जुड़ा हुआ है।
गैस चूल्हे की सबसे बड़ी कमी उसकी कम ऊर्जा दक्षता मानी जाती है। साधारण भाषा में कहें तो गैस की काफी ऊर्जा बर्तन तक पहुंचने से पहले ही हवा में फैल जाती है। अलग-अलग अध्ययनों के अनुसार LPG चूल्हे की थर्मल एफिशिएंसी लगभग 35 से 45 प्रतिशत होती है। यानी अगर आपने 100 रुपये की गैस खर्च की, तो लगभग 40 रुपये की ऊर्जा ही सीधे खाना पकाने में काम आती है, जबकि बाकी ऊर्जा रसोई की हवा को गर्म कर देती है।
इसके उलट इंडक्शन चूल्हा अलग तकनीक से काम करता है। इसमें आग नहीं जलती बल्कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के जरिए बर्तन के तले को सीधे गर्म किया जाता है। इस वजह से गर्मी हवा में कम फैलती है और ऊर्जा का ज्यादा हिस्सा सीधे खाना पकाने में इस्तेमाल होता है। इसी कारण इंडक्शन की ऊर्जा दक्षता लगभग 85 से 90 प्रतिशत तक मानी जाती है।
अब बात करते हैं खर्च की। भारत में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत आमतौर पर 900 से 1100 रुपये के बीच रहती है, हालांकि शहर और सब्सिडी के आधार पर इसमें बदलाव हो सकता है। दूसरी ओर घरेलू बिजली की दरें आम तौर पर 6 से 10 रुपये प्रति यूनिट के आसपास होती हैं। अगर ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखकर तुलना करें तो कई मामलों में इंडक्शन पर खाना पकाना गैस जितना या उससे थोड़ा सस्ता भी पड़ सकता है, खासकर वहां जहां बिजली की दरें कम हैं।
हालांकि इंडक्शन हर स्थिति में परफेक्ट नहीं है। इसके इस्तेमाल के लिए खास तरह के मैग्नेटिक बर्तनों की जरूरत होती है, जैसे स्टील या कास्ट आयरन। पुराने एल्यूमिनियम के बर्तन या कुछ पारंपरिक तवे इसमें काम नहीं करते। इसके अलावा भारतीय किचन में रोटी बनाना एक जरूरी काम है और गैस की खुली आंच पर फूली हुई रोटी बनाना अपेक्षाकृत आसान होता है, जबकि इंडक्शन पर यह थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
सुरक्षा के मामले में इंडक्शन को थोड़ा आगे माना जाता है। गैस चूल्हे में गैस लीक या खुली आग से दुर्घटना का खतरा रहता है, जबकि इंडक्शन में आग नहीं होती और कई मॉडलों में ऑटो कटऑफ जैसी सुविधाएं भी होती हैं। इसी वजह से हॉस्टल, छोटे अपार्टमेंट और बुजुर्गों के घरों में इंडक्शन को ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
गति की बात करें तो इंडक्शन अक्सर गैस से तेज साबित होता है। कई परीक्षणों में पाया गया है कि पानी उबालने या खाना गर्म करने में इंडक्शन 30 से 50 प्रतिशत तक ज्यादा तेज हो सकता है, क्योंकि इसमें ऊर्जा सीधे बर्तन में पैदा होती है।
अगर निष्कर्ष की बात करें तो दोनों के अपने फायदे और सीमाएं हैं। जहां बिजली कटौती ज्यादा होती है या रोज़ रोटी बनानी होती है, वहां गैस बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। वहीं जहां बिजली की सप्लाई स्थिर है और ऊर्जा बचत प्राथमिकता है, वहां इंडक्शन ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
व्यावहारिक तौर पर सबसे समझदारी भरा तरीका यह हो सकता है कि रसोई में दोनों का इस्तेमाल किया जाए। यानी गैस और इंडक्शन का एक साथ उपयोग। उदाहरण के लिए दाल, चावल या सब्जी इंडक्शन पर बनाई जा सकती है और रोटी गैस पर। इससे खाना जल्दी भी बनेगा, बैकअप भी रहेगा और खर्च का संतुलन भी बना रहेगा।


