किडनी स्टोन आजकल एक बहुत आम समस्या बन चुकी है। चाहे नई पीढ़ी यानी GenZ हो या पुरानी जेनरेशन, यह परेशानी हर उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है। हालांकि राहत की बात यह है कि कई बार छोटे स्टोन बिना किसी सर्जरी के अपने आप ही शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
आज हम समझेंगे कि कितने mm तक के किडनी स्टोन अपने आप निकल सकते हैं, क्या सच में ज्यादा पानी पीने से स्टोन घुल जाता है, स्टोन को हटाने के कौन-कौन से तरीके मौजूद हैं और किन परिस्थितियों में यह समस्या इमरजेंसी का रूप ले सकती है।
किडनी स्टोन होने पर सबसे आम लक्षण तेज दर्द होता है। यह दर्द आमतौर पर पीठ के दाएं या बाएं हिस्से में महसूस होता है, लेकिन स्टोन की स्थिति के अनुसार इसकी जगह बदल भी सकती है। कई बार यह दर्द पेशाब करते समय या प्राइवेट पार्ट तक भी पहुंच जाता है। अगर स्टोन 5 mm से छोटा है, तो उसके अपने आप निकलने की संभावना ज्यादा रहती है। जैसे-जैसे स्टोन का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे इसके खुद निकलने की संभावना कम होती जाती है। हालांकि सिर्फ आकार ही नहीं, बल्कि स्टोन की लोकेशन भी अहम भूमिका निभाती है। अगर स्टोन यूरेटर (किडनी और ब्लैडर को जोड़ने वाली नली) के ऊपरी हिस्से में फंसा है, तो उसका बाहर आना मुश्किल हो सकता है, जबकि नीचे की ओर आने पर इसके निकलने के चांस बढ़ जाते हैं। स्टोन निकलते समय तेज दर्द, पेशाब में खून, मितली या उल्टी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। यदि ये लक्षण गंभीर हो जाएं, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए सही इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है।
अब सवाल आता है कि क्या ज्यादा पानी पीने से किडनी स्टोन घुल जाता है? अक्सर लोग ऐसा मानते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। पानी स्टोन को घोल नहीं सकता, क्योंकि यह खनिजों से बना एक सख्त टुकड़ा होता है। हां, ज्यादा पानी पीने से पेशाब का फ्लो बढ़ता है, जिससे अगर स्टोन रास्ते में है तो उसे बाहर निकलने में मदद मिल सकती है। लेकिन स्टोन अपने मूल आकार में ही बाहर आता है, वह घुलता नहीं है।
अगर स्टोन के कारण तेज दर्द हो रहा हो, तो उस समय बहुत ज्यादा पानी पीना सही नहीं होता, क्योंकि इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और दर्द बढ़ सकता है। जब सूजन और दर्द थोड़ा कम हो जाए, तब पानी की मात्रा बढ़ाना फायदेमंद होता है।
किडनी स्टोन के इलाज के लिए आजकल कई आधुनिक तरीके उपलब्ध हैं। स्टोन किडनी, यूरेटर या ब्लैडर में कहीं भी हो सकता है और ज्यादातर मामलों में एंडोस्कोपिक सर्जरी का सहारा लिया जाता है। इस प्रक्रिया में शरीर पर कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता, बल्कि यूरिन के रास्ते से ही अंदर जाकर स्टोन तक पहुंचा जाता है। इसके बाद लेज़र की मदद से स्टोन को छोटे-छोटे टुकड़ों या पाउडर में तोड़ दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया बेहोशी में की जाती है और इसकी रिकवरी भी काफी तेज होती है।
स्टोन की स्थिति के आधार पर अलग-अलग तकनीकें अपनाई जाती हैं, जैसे RIRS, URS, PCNL, Mini PCNL, Mini Perc और CLT। इनमें से कौन-सा तरीका आपके लिए सही रहेगा, यह डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर तय करते हैं।
कुछ मामलों में किडनी स्टोन इमरजेंसी बन सकता है। अगर दर्द इतना तेज हो कि कंट्रोल न हो पाए, बार-बार अस्पताल जाना पड़े, इंजेक्शन लेने पड़ें, या दर्द के कारण खाना-पीना मुश्किल हो जाए, तो यह गंभीर स्थिति हो सकती है। इसके अलावा लगातार उल्टी, पेट फूलना या कमजोरी भी चिंता का विषय है।
यदि पेशाब में अधिक खून आने लगे, बुखार हो या यूरिन इंफेक्शन (UTI) हो जाए, तो इसे इमरजेंसी माना जाता है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज़, दिल की बीमारी या अन्य गंभीर रोग हैं, उनके लिए किडनी स्टोन और भी खतरनाक साबित हो सकता है। साथ ही, अगर स्टोन लंबे समय तक फंसा रहे और दवाओं से बाहर न निकले, तो ऑपरेशन जरूरी हो सकता है।


