देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी का आज जन्मदिन है। भारतीय राजनीति की प्रमुख हस्तियों में शामिल सोनिया का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के विसेन्जा प्रांत के पास स्थित एक छोटे से गांव लूसियाना में हुआ था। उनके पिता का नाम स्टेफिनो मायनो था। उच्च शिक्षा के लिए सोनिया ने इंग्लैंड का रुख किया और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई शुरू की। इसी दौरान उनकी मुलाकात भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से हुई, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
हिंदी कैसे सीखी? सोनिया गांधी ने खुद बताई कहानी
2018 के इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सोनिया गांधी ने इस बात का खुलकर ज़िक्र किया कि हिंदी सीखना उनके लिए आसान नहीं था। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में उन्हें अंग्रेजी सीखने में भी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कैंब्रिज में अपनी पढ़ाई शुरू की, तब वह बहुत कम अंग्रेजी बोल पाती थीं। पहली बार जब इंदिरा गांधी उनसे मिलीं, तो उन्होंने सोनिया से फ्रेंच में बातचीत की, क्योंकि सोनिया अंग्रेजी में सहज नहीं थीं।
राजीव गांधी से शादी के बाद जब सोनिया भारत आईं, तो इंदिरा गांधी ने उन्हें घर में हिंदी बोलने के लिए प्रेरित किया। इसी सलाह पर अमल करते हुए सोनिया ने दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित एक हिंदी संस्थान में दाखिला लिया और वहां कई कोर्स के ज़रिये भाषा को समझा और सीखा। सोनिया मानती हैं कि समय के साथ उनकी हिंदी कमजोर पड़ गई, क्योंकि वह रोज़मर्रा की बातचीत में अधिकतर अंग्रेजी का इस्तेमाल करती थीं। लेकिन राजनीति में आने के बाद, जब उन्हें हिंदी में भाषण देने पड़े, तो पढ़ाई के दौरान मिली वही बुनियादी सीख उनके बहुत काम आई। धीरे-धीरे वह भाषा में सहज होती चली गईं।
राजीव गांधी के राजनीति में आने के खिलाफ क्यों थीं सोनिया?
कॉन्क्लेव के दौरान सोनिया गांधी ने इस सवाल पर भी खुलकर बात की कि वह शुरुआत में राजीव गांधी के राजनीति से जुड़ने के पक्ष में क्यों नहीं थीं।उनके अनुसार, राजनीति एक ऐसा क्षेत्र है जहां ईमानदार और संवेदनशील व्यक्ति को अपनी निजी जिंदगी को पीछे छोड़ना पड़ता है। उस समय उनका परिवार बेहद खुशहाल था—दो छोटे बच्चे थे और एक शांतिपूर्ण जीवन चल रहा था। सोनिया नहीं चाहती थीं कि राजनीति की उथल-पुथल से उनके परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़े।
सोनिया ने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या ने उनके भीतर और भय पैदा कर दिया। उन्हें लगता था कि अगर राजीव राजनीति में होते, तो वह भी इस हिंसा की चपेट में आ सकते थे। बाद में उनकी यह आशंका सच साबित हुई जब राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई। इस बात को याद करते हुए वो भावुक भी हो गईं।
इस लेख में प्रस्तुत जानकारी सार्वजनिक भाषणों, इंटरव्यू, ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। यह लेख केवल सूचना प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है तथा इसमें किसी भी राजनीतिक व्यक्ति या दल के पक्ष या विरोध का उद्देश्य नहीं है।


