4 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद स्थित भारत सिटी सोसाइटी से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई। यहाँ 12, 14 और 16 साल की तीन सगी बहनों—निशिका, प्राची और पाखी—ने एक साथ अपनी जान दे दी। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में इस घटना को किसी हद तक ऑनलाइन कोरियन कल्चर और डिजिटल गेमिंग से प्रभावित बताया गया है, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।
पुलिस को घटनास्थल से एक आठ पन्नों का नोट मिला, जिसमें “हम कोरिया नहीं छोड़ सकते, कोरिया हमारी ज़िंदगी है” जैसे वाक्य लिखे थे। इसके साथ ही उनके कमरे की दीवारों पर “I am very, very alone” जैसे शब्द भी लिखे मिले, जो उनके गहरे भावनात्मक अकेलेपन की ओर इशारा करते हैं। परिवार का कहना है कि तीनों बहनों का मोबाइल फोन इस्तेमाल कई वर्षों से अत्यधिक था।
परिजनों के अनुसार, कुछ समय पहले बच्चों से फोन जब्त कर लिए गए थे, जिसके बाद उनकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति और ज्यादा बिगड़ती चली गई। हालांकि यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि पुलिस ने अब तक यह नहीं कहा है कि कोरियन संस्कृति या किसी ऑनलाइन गेम ने सीधे आत्महत्या के लिए उकसाया हो। किसी भी प्रमाणित “डेथ गेम” या आत्महत्या से जुड़े निर्देशों का फिलहाल कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।
कोरियन कल्चर दरअसल केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि एक व्यापक और बहुआयामी वैश्विक संस्कृति है, जिसमें संगीत, फिल्में, वेब सीरीज़, भोजन, फैशन, भाषा और डिजिटल जीवनशैली शामिल हैं। के-पॉप दक्षिण कोरिया से निकला एक वैश्विक संगीत आंदोलन है, जिसने BTS और BLACKPINK जैसे बैंड्स के ज़रिये दुनियाभर में करोड़ों युवाओं को प्रभावित किया है। इनके गाने, डांस स्टाइल और फैशन खासकर जेन-ज़ेड को गहराई से आकर्षित करते हैं।
कोरियन फिल्में और वेब सीरीज़ जैसे “Parasite”, “Train to Busan” और “Squid Game” ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। भावनात्मक गहराई, तेज़ कहानी और अलग प्रस्तुति के कारण ये कंटेंट युवा दर्शकों से तुरंत जुड़ जाता है। इसके साथ ही कोरियन फूड और डिजिटल गेमिंग कल्चर भी भारत समेत कई देशों में तेजी से लोकप्रिय हुआ है।
भारत में कोरियन कल्चर के फैलने की बड़ी वजह सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स हैं। Instagram, YouTube और Shorts जैसे प्लेटफॉर्म्स पर के-पॉप, के-ड्रामा और कोरियन लाइफस्टाइल से जुड़ा कंटेंट लगातार दिखाई देता है। इसके कारण खासकर जेन-ज़ेड कम उम्र में ही इस कल्चर से जुड़ जाती है और इसे अपनी पहचान का हिस्सा मानने लगती है।
BTS जैसे बैंड्स के फैन, जिन्हें ARMY कहा जाता है, केवल श्रोता नहीं बल्कि एक सक्रिय डिजिटल कम्युनिटी का हिस्सा होते हैं। वे सोशल मीडिया पर लगातार मौजूद रहते हैं, कैंपेन चलाते हैं और अपने पसंदीदा कलाकारों को प्रमोट करते हैं। ज़्यादातर मामलों में यह जुड़ाव सकारात्मक होता है, लेकिन जब यह पढ़ाई, पारिवारिक रिश्तों और मानसिक संतुलन पर हावी होने लगे, तब परेशानी पैदा हो सकती है।
इस मामले में परिवार का मानना था कि बहनों ने कोरियन कंटेंट और गेमिंग को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से ऊपर रख दिया था। जब फोन उनसे छीने गए, तो उनका भावनात्मक टूटना इस बात की ओर इशारा करता है कि वे पहले से ही मानसिक रूप से बेहद संवेदनशील स्थिति में थीं। यह घटना किसी एक फैनबेस या संस्कृति को दोषी ठहराने का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि डिजिटल निर्भरता और अकेलापन मिलकर कितना गंभीर रूप ले सकते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का एल्गोरिदम यूज़र को वही कंटेंट बार-बार दिखाता है, जिसे वह पहले देख चुका होता है। इससे व्यक्ति एक ही तरह के वीडियो, गेम या विचारों में फँसता चला जाता है और धीरे-धीरे यह आदत obsessive व्यवहार में बदल सकती है। अगर इस दौरान परिवार या दोस्तों का भावनात्मक सहारा न मिले, तो मानसिक स्वास्थ्य और अधिक प्रभावित हो सकता है।
कोरियन कल्चर का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में युवा इससे जुड़ रहे हैं। सस्ता इंटरनेट, तेज़ ट्रेंडिंग कंटेंट, मजबूत फैनबेस और ऑनलाइन अपनापन मिलकर एक ऐसी आभासी दुनिया बना देते हैं, जो कई बार वास्तविक जीवन से ज्यादा प्रभावशाली लगने लगती है।
यह त्रासदी यह भी याद दिलाती है कि कोई भी ऑनलाइन संस्कृति अपने आप में खतरनाक नहीं होती। आमतौर पर अकेलापन, मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी, असंतुलित डिजिटल समय और परिवार या समाज से दूरी—ये सभी मिलकर ऐसी स्थितियां पैदा करते हैं। इसलिए बच्चों और युवाओं के साथ खुली बातचीत, समझदारी और संवेदनशीलता बेहद ज़रूरी है।
ग़ाज़ियाबाद की यह घटना अत्यंत दुखद और चेतावनी देने वाली है। इसे केवल कोरियन कल्चर से जोड़कर देखना एकतरफा दृष्टिकोण होगा। यह एक गहरा सामाजिक और मनोवैज्ञानिक मामला है, जिसमें डिजिटल दुनिया, भावनात्मक असंतुलन और सपोर्ट सिस्टम की कमी जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं। सबसे ज़रूरी है कि हम युवाओं को संतुलित, सुरक्षित और स्वस्थ डिजिटल जीवन जीने में मदद करें।


