फरीदाबाद में भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार मिलने के मामले में अब एक महिला डॉक्टर का नाम सामने आया है. लखनऊ के लालबाग क्षेत्र की रहने वाली डॉक्टर शाहीन शाहिद को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के बाद ATS ने 11 नवंबर को कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में छापा मारकर उनसे जुड़े सभी आधिकारिक रिकॉर्ड कब्जे में ले लिए. यही वह कॉलेज है, जहां शाहीन पहले लेक्चरर के तौर पर पढ़ाती थीं. दिल्ली पुलिस स्रोतों से यह भी जानकारी सामने आई है कि शाहीन, जैश-ए-मोहम्मद की महिला शाखा ‘जमात-उल-मोमिनात’ की भारत में प्रमुख भूमिका निभा रही थीं. इस शाखा की कमान मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के पास मानी जाती है, जिनके पति यूसुफ अजहर को भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में ढेर किया था. बताया जाता है कि पुरुष नेटवर्क पर दबाव बढ़ने के बाद जैश ने पहली बार महिलाओं को जोड़ने के लिए यह विंग बनाई थी, जिसका उद्देश्य न सिर्फ जैश कमांडरों की पत्नियों बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर महिलाओं और छात्राओं को संगठन की ओर आकर्षित करना था.
शाहीन शाहिद की नियुक्ति साल 2006 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से हुई थी और वह कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर बनीं. 2009-10 में उनका ट्रांसफर कन्नौज गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कर दिया गया. कॉलेज रिकॉर्ड के अनुसार 2013 में वह बिना किसी सूचना के अचानक गायब हो गईं, जिसके बाद कई नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. अंततः 2021 में राज्य सरकार ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं. व्यक्तिगत जीवन में, उन्होंने 2015 में अपने पति जफर अयात से तलाक लिया और इसके बाद कथित रूप से लखनऊ में रहने लगीं.
हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से भी उनका संबंध रहा, जहां उनके व्यवहार को लेकर शिकायतें थीं. वहीं, इसी यूनिवर्सिटी में उनकी मुलाकात पुलवामा के रहने वाले डॉक्टर मुजम्मिल गनई उर्फ मूसैब से हुई, जो जम्मू-कश्मीर में जैश समर्थक पोस्टर लगाने के मामले में वांछित था. फरीदाबाद में 2900 किलो विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ, राइफलें, पिस्टल और बड़ी मात्रा में गोलियां मिलने के बाद मुजम्मिल को भी गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि हथियारों से भरी जो कार बरामद हुई, वह डॉ. शाहीन शाहिद के नाम पर रजिस्टर्ड थी. HR-51 नंबर वाली यह स्विफ्ट कार मुजम्मिल की निशानदेही पर पुलिस ने जब्त की.


