जब भी हम बाज़ार में कुछ खाने या पीने जाते हैं, तो अक्सर चाय, कॉफी या खाना हमें प्लास्टिक या पेपर के डिस्पोज़ेबल कप और प्लेट में ही दिया जाता है। ये डिस्पोज़ेबल चीज़ें सिंगल यूज़ के लिए बनाई जाती हैं और लोगों को बेहद सुविधाजनक लगती हैं। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, सड़क किनारे चाय की दुकानों, दफ्तरों और होटलों में इस्तेमाल हो रहे ये डिस्पोज़ेबल कप और प्लेट सेहत के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि गर्म चीज़ों के संपर्क में आने पर ये डिस्पोज़ेबल प्रोडक्ट प्लास्टिक जैसे ही कई गंभीर खतरे पैदा कर सकते हैं।
दिखने में ये कप और प्लेट पूरी तरह कागज़ के लगते हैं, लेकिन असल में ये शुद्ध कागज़ से नहीं बने होते। इन्हें पानी और तरल पदार्थों से बचाने के लिए इनके अंदर एक बेहद पतली प्लास्टिक की परत चढ़ाई जाती है, जो आमतौर पर दिखाई नहीं देती। यह परत ज़्यादातर पॉलीइथिलीन (PE) या इसी तरह के अन्य पॉलिमर से बनी होती है। यही कोटिंग कप और प्लेट को लीक-प्रूफ बनाती है, लेकिन साथ ही खाने-पीने की चीज़ों को सीधे प्लास्टिक के संपर्क में ले आती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जब गर्म चाय, कॉफी या ताज़ा बना हुआ खाना इन प्लास्टिक-कोटेड डिस्पोज़ेबल कप और प्लेट के संपर्क में आता है, तो यह परत नर्म होकर गलने लगती है। इस दौरान दो प्रक्रियाएं तेज़ हो जाती हैं—पहली, सूक्ष्म प्लास्टिक के कण निकलने लगते हैं और दूसरी, कुछ केमिकल्स भोजन और ड्रिंक्स में मिलना शुरू कर देते हैं।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ये सूक्ष्म प्लास्टिक कण आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन इनके बार-बार सेवन से शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। गर्म भोजन और पेय पदार्थों के साथ शरीर में पहुंचने वाले ये कण अलग-अलग अंगों में जमा हो सकते हैं।
कई स्टडीज़ और रिपोर्ट्स यह इशारा करती हैं कि माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में आने से आंतों में जलन और सूजन हो सकती है, पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है, माइक्रोबायोम में असंतुलन पैदा हो सकता है और लंबे समय में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।


