नई दिल्ली/ग्लास्गो: भारत के बिहार के चम्पारण में जन्मे स्कॉटिश राजनेता एवं शिक्षाविद प्रो. ध्रुव कुमार ने स्कॉटलैंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। अल्बा (ALBA) पार्टी ने उन्हें 2026 के स्कॉटिश संसदीय चुनाव के लिए ग्लास्गो रीजनल लिस्ट का उम्मीदवार घोषित किया है। स्कॉटिश संसद ‘होलीरूड’ तक उनकी यह पहुंच चम्पारण के साथ-साथ पूरे बिहार और भारत के लिए गर्व और भावनाओं से भरा क्षण है।
प्रो. ध्रुव कुमार पहले से ही स्कॉटिश राजनीति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुचर्चित और जाना-पहचाना नाम हैं। वर्ष 2024 के ब्रिटेन आम चुनाव में उन्होंने ग्लास्गो साउथ से वेस्टमिन्स्टर (यूके-ब्रिटेन संसद) चुनाव लड़ा था। स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और आर्थिक बराबरी पर केंद्रित उनके सक्रिय जनसंपर्क अभियान ने उन्हें स्कॉटलैंड के प्रो-इंडिपेंडेंस आंदोलन में एक गंभीर और सम्मानित चेहरा बनाया, और वही अनुभव आज उनके होलीरूड अभियान की मजबूत नींव है।
स्कॉटिश स्वतंत्रता के प्रखर समर्थक ध्रुव कुमार मानते हैं कि संप्रभुता ही महँगाई, आवास संकट और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों से निपटने की असली कुंजी है। वे ‘स्कॉटिश एनर्जी पैरेडॉक्स’ की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं, जहां तेल-गैस और नवीकरणीय ऊर्जा की भरपूर संभावनाओं के बावजूद आम परिवार ऊँचे बिजली-गैस बिलों से जूझते हैं। उनके अनुसार सार्वजनिक स्वामित्व, न्यायसंगत कीमतें और कामगारों के लिए ‘जस्ट ट्रांज़िशन’ (न्यायपूर्ण संक्रमण) एक स्वतंत्र स्कॉटलैंड की बुनियादी प्राथमिकताएं होनी चाहिए।
स्कॉटिश राजनेता ध्रुव कुमार की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक स्कॉटिश संसद में पहली बार हिंदू-विरोध (Hinduphobia) की निंदा करने वाला ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कराने में उनकी अग्रणी और सबसे बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने हिंदूफोबिया मोशन को स्कॉटिश पार्लियामेंट में अपनी विस्तृत “Hinduphobia in Scotland” रिपोर्ट और राजनीतिक निपुणता के चलते पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण उनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ। चम्पारण सत्याग्रह और महात्मा गांधी की विरासत से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने विभिन्न समुदायों और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद कर इस विषय को राजनीतिक एजेंडे पर लाने में योगदान दिया। इस पहल को ब्रिटेन सहित दुनिया भर में भारतीय प्रवासी समाज ने सराहा और इसे समुदायों की चिंताओं को लोकतांत्रिक मंच पर स्थान दिलाने वाला कदम माना गया।
ध्रुव कुमार की पेशेवर और अकादमिक पृष्ठभूमि भी उनकी राजनीति को ठोस आधार देती है। इंजीनियरिंग में प्रशिक्षित ध्रुव ने आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, शिक्षा, ट्रेड यूनियन और राजनीतिक अर्थशास्त्र के क्षेत्रों में काम किया। इसी अनुभव के बल पर वे भारत-स्कॉटलैंड के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग के समर्थक रहे हैं। वे “गंगा–क्लाइड आर्थिक कॉरिडोर” की अवधारणा के प्रमुख पैरोकारों में गिने जाते हैं, जिसके जरिए नवीकरणीय ऊर्जा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और व्हिस्की-स्पिरिट्स जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की परिकल्पना की गई है।
ध्रुव कुमार का योगदान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने वेस्टमिन्स्टर में शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण) संबंधी संसदीय समिति/जांच प्रक्रिया में भी योगदान दिया, जहां उन्होंने स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक जहाज-निर्माण उद्योग के पुनरोत्थान, निवेश और निष्पक्ष सरकारी खरीद के जरिए रोजगार सुरक्षित करने पर जोर दिया।
ग्लास्गो में ध्रुव कुमार को एक जमीनी और सक्रिय नेता के रूप में देखा जाता है। ट्रेड यूनियन आंदोलनों में भागीदारी के जरिए उन्होंने बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और स्थायी रोजगार की वकालत की है। आवास के मुद्दे पर वे खराब गुणवत्ता, बढ़ते किराये और सामाजिक आवास की कमी जैसे सवालों को उठाते रहे हैं। साथ ही, एनएचएस (स्वास्थ्य सेवा) और केयर सेक्टर पर बढ़ते दबाव को लेकर भी वे लगातार चिंता जाहिर करते रहे हैं।
राजनीतिक अर्थशास्त्र, भू-राजनीति और संवैधानिक बदलावों पर उनके लेख, भाषण और मीडिया संवाद प्रो-इंडिपेंडेंस समर्थकों में व्यापक रूप से पढ़े-सुने जाते हैं। स्थानीय ग्लास्गो के मुद्दों को वे ब्रेक्ज़िट और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से जोड़कर समझाते हैं, जिससे उन्हें आंदोलन के विचारशील और नीतिगत चेहरों में गिना जाने लगा है।
सम्पूर्ण भारत, विशेषकर बिहार और चम्पारण में, उनकी इस उपलब्धि को भावनात्मक रूप से देखा जा रहा है। परिवारजनों के अनुसार ध्रुव कुमार आज भी चम्पारण सत्याग्रह और नील किसानों के संघर्ष को अपने जीवन की प्रेरणा मानते हैं। उनके लिए चम्पारण से निकलकर स्कॉटिश संसद के दरवाज़े तक पहुँचना भारतीय संकल्प और स्कॉटलैंड की लोकतांत्रिक खुली परंपरा—दोनों का प्रतीक है।
स्कॉटलैंड होलीरूड चुनाव अभियान के तेज होने के साथ प्रो. ध्रुव कुमार ग्लास्गो क्षेत्र में ALBA के अन्य उम्मीदवारों के साथ मिलकर चुनाव मैदान में सक्रिय हैं। यदि वे निर्वाचित होते हैं, तो वे ग्लास्गो की जनता की आवाज़ के साथ-साथ बिहार और भारत के उन सपनों को भी होलीरूड तक पहुंचाने वाले प्रतिनिधि बन सकते हैं, जो मेहनत, शिक्षा और संघर्ष के दम पर वैश्विक मंच पर पहचान बनाने की प्रेरणा देते हैं।


