दिल्ली ब्लास्ट और फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल मामले के बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियां अब हाई-अलर्ट पर हैं। जांच में जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं। शुरुआती जांच से पता चला है कि इन दोनों घटनाओं से जुड़े आरोपी टेलीग्राम (Telegram App) पर सक्रिय कुछ संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़े हुए थे। बताया जा रहा है कि इन्हीं ग्रुप्स से मिले निर्देशों के बाद उन्होंने तुर्किए की यात्रा की थी। हालांकि, उन निर्देशों की असल प्रकृति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।
तुर्किए (Turkey) अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण लंबे समय से आतंकियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। इस्लामिक स्टेट (Islamic State) से जुड़ने वाले ज्यादातर लोग पहले तुर्किए के रास्ते ही सीरिया पहुंचे थे, जिस वजह से इसे “सीरिया का बैकडोर” भी कहा जाता है। एजेंसियों को शक है कि डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर उमर की तुर्किए यात्रा के पीछे जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) के नेटवर्क का हाथ था।
सूत्रों के मुताबिक, तुर्किए से लौटने के बाद दोनों ने भारत के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय होने की योजना बनाई थी। बताया जा रहा है कि जैश में उनके हैंडलर ने उन्हें निर्देश दिए थे कि वे देशभर में फैल जाएं और किसी एक जगह पर ज्यादा समय न बिताएं, ताकि पकड़े जाने की संभावना कम हो सके।
इसी रणनीति के तहत डॉक्टर मुजम्मिल ने फरीदाबाद जबकि डॉक्टर उमर ने सहारनपुर को अपना ठिकाना चुना। अब जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इन दोनों ने तुर्किए में किसी आतंकी ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया था। एजेंसियां उनके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ की जांच कर रही हैं ताकि टेलीग्राम चैट्स और संचार संबंधी डिटेल्स से कोई ठोस सबूत मिल सके।
सीसीटीवी फुटेज से यह पुष्टि हो चुकी है कि धमाके के वक्त विस्फोटक कार डॉक्टर उमर ही चला रहा था। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विस्फोट उसने खुद ट्रिगर किया था या फिर यह किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुआ एक्सीडेंटल ब्लास्ट था।
अब तक की जांच में इस मामले के तार कश्मीर के पुलवामा और कुलगाम तक जा पहुंचे हैं। इस मॉड्यूल से जुड़ी महिला डॉक्टर शाहीन शाहिद को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, और अब एजेंसियां पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं।


