अगली बार जब आप किसी मेडिकल स्टोर पर जाएं, तो वहां एक अलग तरह का QR कोड आपकी नजर में आ सकता है। ज़रा ठहरिए… घबराइए नहीं पहली नज़र में आपको लगेगा कि इसमें नया क्या है आजकल तो हर दुकान पर पेमेंट के लिए QR कोड लगे ही होते हैं। लेकिन यह वाला कोड भुगतान के लिए नहीं, बल्कि आपकी सेहत से जुड़ी एक अहम जानकारी के लिए है।
यह खास QR कोड केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के निर्देश पर लगाया जा रहा है। इसके जरिए आम लोग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, फार्मासिस्ट और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी लोग दवाइयों से होने वाले साइड इफेक्ट की शिकायत आसानी से दर्ज कर सकेंगे।
सेहत की सुरक्षा से जुड़ा कोड
CDSCO ने पिछले साल दिसंबर में दवाइयों की खुदरा और थोक दुकानों पर इस QR कोड को अनिवार्य रूप से लगाने का आदेश दिया था। इसे ऐसी जगह लगाना जरूरी है जहां ग्राहक आसानी से देख सकें। इसके साथ ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) का टोल-फ्री नंबर 1800-180-3024 भी लिखा होना चाहिए।
यह पहल सरकार के PvPI (Pharmacovigilance Programme of India) के Adverse Drug Reaction Monitoring System का हिस्सा है। इसका मकसद दवाओं के दुष्प्रभावों पर नजर रखना है। यदि किसी दवा को लेने के बाद आपको त्वचा पर चकत्ते, चक्कर, उल्टी जैसा महसूस होना, सूजन या अन्य परेशानी हो, तो आप इस QR कोड को स्कैन करके तुरंत रिपोर्ट कर सकते हैं.
आप सोच सकते हैं कि जब दवाएं कई चरणों के परीक्षण के बाद बाजार में आती हैं, तो फिर साइड इफेक्ट कैसे हो सकते हैं? दरअसल, परीक्षण सीमित लोगों पर होते हैं, पूरे देश की आबादी पर नहीं। इसलिए कोई दवा जो दूसरों पर असरदार हो, वही किसी व्यक्ति में उल्टा असर भी दिखा सकती है। ऐसे मामलों को दर्ज करना जरूरी होता है ताकि भविष्य में बेहतर निगरानी हो सके।
रिपोर्ट करना अब बेहद आसान
पहले साइड इफेक्ट की शिकायत दर्ज करना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया हुआ करती थी। लेकिन QR कोड के जरिए यह काम कुछ ही मिनटों में हो सकता है। मरीज, डॉक्टर और केमिस्ट कोई भी व्यक्ति इसे स्कैन करके जानकारी दे सकता है।
इसलिए अगली बार जब भी आप दवा लेने जाएं, तो दुकान पर लगे CDSCO के इस QR कोड पर ध्यान जरूर दें। अगर यह वहां नहीं दिखे, तो दुकानदार को इसकी याद दिलाना भी जरूरी है। क्योंकि जितनी ज्यादा रिपोर्टिंग होगी, उतनी ही दवाओं की सुरक्षा बेहतर होगी और लोगों की सेहत भी सुरक्षित रहेगी.


