आज के समय में वायर्ड ईयरफोन्स का इस्तेमाल काफी कम हो गया है। अब ज़्यादातर लोग ब्लूटूथ हेडफोन्स, नेकबैंड या ईयरबड्स को ही प्राथमिकता देते हैं। वजह साफ है ये इस्तेमाल में आसान हैं। बस ब्लूटूथ ऑन करें, डिवाइस कनेक्ट करें और आराम से फोन को जेब या बैग में रखकर भी म्यूज़िक या कॉल्स का मज़ा लेते रहें।
लेकिन इसके साथ एक आम चिंता भी सामने आती है क्या ब्लूटूथ ईयरफोन्स का इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है? खासकर, क्या इससे ब्रेन ट्यूमर या कैंसर का खतरा बढ़ सकता है?
इसका सीधा जवाब है नहीं, ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण अब तक नहीं मिला है। हां, ये सही है कि ब्लूटूथ डिवाइस से रेडिएशन निकलती है, लेकिन ये नॉन-आयनाइज़िंग रेडिएशन होती है। इसका मतलब ये है कि ये हमारे DNA को नुकसान नहीं पहुंचाती और न ही शरीर की कोशिकाओं को तोड़ती है। जबकि कैंसर तब विकसित होता है, जब DNA में बदलाव या क्षति होती है।
दरअसल, ब्लूटूथ ईयरफोन्स की तुलना में आपके मोबाइल फोन से ज्यादा रेडिएशन निकलती है। इसलिए घबराने की ज़रूरत नहीं है। अब तक हुई रिसर्च में भी ब्लूटूथ डिवाइस और ब्रेन कैंसर के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
हालांकि, एक बात जरूर ध्यान रखने वाली है अगर आप लंबे समय तक लगातार ईयरफोन्स का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे आपकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि आप 60-60 रूल अपनाएं। यानी आवाज़ 60% से कम रखें और एक बार में 60 मिनट से ज्यादा ईयरफोन्स का इस्तेमाल न करें। बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें, खासकर अगर आप गेमिंग करते हैं या काम के सिलसिले में घंटों ईयरफोन्स लगाए रखते हैं।
इसके अलावा, ड्राइविंग के दौरान ईयरफोन्स का इस्तेमाल करने से बचें। जहां तक संभव हो, कॉल्स के लिए स्पीकर का उपयोग करें और फोन को कान से थोड़ा दूर रखें। साथ ही, फोन का इस्तेमाल भी सीमित करने की कोशिश करें।
अब बात करते हैं ब्रेन ट्यूमर के कुछ लक्षणों की। लगातार सिरदर्द रहना, बार-बार उल्टी आना ये इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा, ट्यूमर का असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह दिमाग के किस हिस्से में है। अगर यह फ्रंटल एरिया में होता है, तो व्यक्ति के व्यवहार और याददाश्त में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ मामलों में हार्मोनल असंतुलन भी हो सकता है। सुनने या देखने की क्षमता में कमी भी इसके संकेत हो सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को ऐसे लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो लापरवाही बिल्कुल न करें। तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।


