AI Summit 2026 अब समाप्त हो चुका है। पांच दिनों तक चले इस बड़े टेक इवेंट में दुनिया भर के दिग्गज CEO शामिल हुए। Jensen Huang स्वास्थ्य कारणों के चलते इसमें शामिल नहीं हो सके, लेकिन Sam Altman, Sundar Pichai और Dario Amodei जैसे बड़े नामों की मौजूदगी ने इस समिट को खास बना दिया।
इतने बड़े आयोजन को देखकर साफ समझ आता है कि टेक कंपनियों के लिए अमेरिका के बाद भारत एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल यूजर बेस और तकनीक को जल्दी अपनाने वाली नई पीढ़ी। AI कंपनियों के लिए इतना बड़ा डेटा और टैलेंट का कॉम्बिनेशन कहीं और आसानी से नहीं मिलता।
हालांकि, इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है जो उतना ही महत्वपूर्ण है। AI का असली खेल क्लाउड पर नहीं, बल्कि जमीन पर बने विशाल डेटा सेंटर्स में चलता है। ये डेटा सेंटर्स बड़ी-बड़ी इमारतों में बनाए जाते हैं, जहां हजारों GPU और सर्वर लगातार काम करते हैं। इन्हें चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और साफ पानी की जरूरत होती है।
बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर अमेरिका जैसे देशों में जहां पिछले कुछ सालों में खपत अचानक बढ़ी है। नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में समय लगता है, और इसी वजह से कंपनियां नए विकल्प तलाश रही हैं। वहीं, डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए पानी का उपयोग भी बड़े पैमाने पर होता है। अनुमान के अनुसार, 1 kWh ऊर्जा से उत्पन्न गर्मी को कंट्रोल करने के लिए लगभग 9 लीटर पानी की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि कंपनियां चीन का रुख क्यों नहीं करतीं। दरअसल, चीन में सस्ती लेबर और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद, डेटा सिक्योरिटी और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण अमेरिकी कंपनियां वहां बड़े स्तर पर डेटा सेंटर्स स्थापित करने से बचती हैं। भरोसे की कमी और टेक्नोलॉजी चोरी के आरोप भी इसकी बड़ी वजह हैं।
यहीं पर भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आता है। Google ने विशाखापत्तनम में बड़े डेटा सेंटर की योजना बनाई है, जबकि OpenAI Tata Group के साथ मिलकर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। Microsoft और Meta भी भारत में अपने डेटा सेंटर नेटवर्क को लगातार विस्तार दे रहे हैं।
इसके अलावा Reliance Industries और Anthropic के बीच बड़े निवेश की साझेदारी भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारत में सस्ता टैलेंट, तेजी से बढ़ती डिजिटल पहुंच और सरकारी सपोर्ट इसे और आकर्षक बनाते हैं। NITI Aayog के पूर्व CEO Amitabh Kant भी भारत की इस बढ़ती ताकत को स्वीकार कर चुके हैं।
कुल मिलाकर, AI कंपनियों के लिए भारत अवसरों की जमीन बनता जा रहा है। एक तरफ ये कंपनियां भारी निवेश और रोजगार के नए अवसर लेकर आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इन डेटा सेंटर्स के कारण बिजली और पानी जैसे संसाधनों पर दबाव बढ़ने का खतरा भी है।
अगर इस संतुलन को सही तरीके से संभाला गया, तो आने वाले वर्षों में भारत सिर्फ टेक यूजर नहीं, बल्कि एक ग्लोबल टेक पावर के रूप में उभर सकता है। और तब शायद “अमेरिकन ड्रीम” की जगह “इंडियन ड्रीम” नई पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा सपना बन जाएगा।


