आज वर्ल्ड कैंसर डे है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन की एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर रिसर्च ऑन कैंसर के मुताबिक, साल 2022 में दुनियाभर में कैंसर के लगभग दो करोड़ नए मामले सामने आए थे, जबकि करीब 97 लाख लोगों की मौत कैंसर की वजह से हुई। भारत में हर एक लाख आबादी पर लगभग 100 लोग कैंसर से प्रभावित होते हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, साल 2023 में देश में कैंसर के 14 लाख नए मामले दर्ज किए गए।
इन दिनों सोशल मीडिया पर कैंसर से लड़ने के लिए विटामिन D को एक असरदार उपाय के तौर पर पेश किया जा रहा है। कई रिपोर्ट्स और पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि विटामिन D कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। लेकिन इस दावे की सच्चाई क्या है, यह समझना ज़रूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि विटामिन D को लेकर फैली कई बातें पूरी तरह वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
वैज्ञानिक तौर पर यह साबित नहीं हुआ है कि विटामिन D किसी भी तरह के कैंसर को होने से रोक सकता है। एक साल में कितने लोगों को कैंसर होगा, इसमें विटामिन D की कोई सीधी भूमिका नहीं पाई गई है। हालांकि, कुछ अध्ययनों में यह ज़रूर सामने आया है कि जिन मरीज़ों में विटामिन D की कमी नहीं होती, उनमें एडवांस स्टेज के कैंसर के मामले कम देखने को मिलते हैं। ऐसे मरीज़ों में कैंसर अक्सर शुरुआती चरण में ही पकड़ में आ जाता है और शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने की संभावना भी कम होती है।
यह मानना भी एक मिथक है कि विटामिन D कैंसर सेल्स को मार सकता है। अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि विटामिन D सीधे तौर पर कैंसर सेल्स को खत्म करता है। कैंसर सेल्स को नष्ट करने के लिए आज भी कीमोथेरेपी, कैंसर की दवाइयां, इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी ही सबसे प्रभावी इलाज माने जाते हैं। ये उपचार खासतौर पर कैंसर सेल्स पर काम करते हैं।
विटामिन D का मुख्य काम हड्डियों को मज़बूत बनाना और शरीर की इम्यूनिटी को सपोर्ट करना है। इसका रोल कैंसर सेल्स को मारने में नहीं, बल्कि कैंसर के इलाज के दौरान शरीर को मज़बूत बनाए रखने में होता है। यह इलाज के साथ मिलकर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कुछ हद तक बेहतर कर सकता है, लेकिन इसे कैंसर का इलाज नहीं माना जा सकता।
यह भी ज़रूरी है कि मज़बूत इम्यूनिटी अपने आप में कैंसर से पूरी तरह सुरक्षा नहीं देती। कैंसर के ज़्यादातर मामले लाइफस्टाइल से जुड़े होते हैं, जैसे प्रदूषित हवा में सांस लेना, असुरक्षित पानी पीना, फल-सब्ज़ियों की कमी, शराब और सिगरेट का सेवन, और शारीरिक गतिविधि की कमी। इसलिए सिर्फ विटामिन D या इम्यूनिटी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
विटामिन D का सबसे प्राकृतिक स्रोत धूप है। रोज़ाना लगभग आधा घंटा धूप में रहने से शरीर को कुछ मात्रा में विटामिन D मिल सकता है, लेकिन मौसम, बादल और प्रदूषण की वजह से अक्सर यह पर्याप्त नहीं होता। ऐसे में डॉक्टर की सलाह से विटामिन D सप्लीमेंट लिया जा सकता है। एक वयस्क व्यक्ति को रोज़ करीब 1000 इंटरनेशनल यूनिट विटामिन D की ज़रूरत होती है।
इसके साथ ही संतुलित आहार लेना बेहद ज़रूरी है, जिसमें सभी जरूरी विटामिन्स, मिनरल्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स शामिल हों। नियमित व्यायाम, शराब और सिगरेट से दूरी, और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही कैंसर के खतरे को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।


