पैरों पर उभरी हुई, टेढ़ी-मेढ़ी नसें… कई लोगों के पैरों में आपने ऐसी नसें ज़रूर देखी होंगी। इन्हें ही वैरिकोज़ वेन्स कहा जाता है।
शुरुआत में ये नसें हल्की-सी दिखाई देती हैं, लेकिन समय के साथ ये मोटी होने लगती हैं। इनमें दर्द, भारीपन और जलन महसूस हो सकती है। आमतौर पर वैरिकोज़ वेन्स नीले, गहरे हरे या बैंगनी रंग की होती हैं और ज़्यादातर मामलों में पैरों में ही दिखाई देती हैं। आज के समय में वैरिकोज़ वेन्स एक आम समस्या बन चुकी है। बहुत से लोग जब अपने पैरों में ऐसी नसें देखते हैं, तो घबरा जाते हैं। मन में सवाल आता है—
क्या वैरिकोज़ वेन्स होना खतरनाक है?
या फिर यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है?
आज हम यही समझेंगे कि वैरिकोज़ वेन्स क्या होती हैं, ये क्यों होती हैं, इनसे कितना खतरा होता है, इससे बचाव कैसे किया जा सकता है और अगर वैरिकोज़ वेन्स हो जाएं तो इलाज क्या है। साथ ही जानेंगे कि किन लोगों को इसका जोखिम ज़्यादा रहता है।
वैरिकोज़ वेन्स दरअसल पैरों की वे नसें होती हैं जो मोटी, उभरी हुई और टेढ़ी-मेढ़ी दिखने लगती हैं। इसकी अलग-अलग स्टेज होती हैं। शुरुआती दौर में कुछ नसें पतली दिखाई देती हैं, जिन्हें रेटिकुलर वेन्स कहा जाता है। इसके अलावा, लंबे समय तक खड़े रहने पर पैरों में सूजन आना, टखनों के पास त्वचा का रंग काला पड़ना या ऐसा घाव बन जाना जो महीनों तक न भरे— ये सभी वैरिकोज़ वेन्स के एडवांस स्टेज के लक्षण हो सकते हैं।
वैरिकोज़ वेन्स क्यों होती हैं?
पैरों की नसों का काम होता है खून को नीचे से ऊपर, यानी दिल की ओर भेजना। इसमें नसों के अंदर मौजूद वॉल्व मदद करते हैं, जो खून को वापस नीचे गिरने से रोकते हैं। लेकिन जब इन वॉल्व्स पर ज़्यादा दबाव पड़ता है, तो वे धीरे-धीरे कमजोर हो सकते हैं। जिन नौकरियों में लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है, वहां ये वॉल्व लगातार काम करते रहते हैं। प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में गर्भाशय का दबाव नसों पर बढ़ जाता है। मोटापे की स्थिति में खून को ज़्यादा वजन के खिलाफ ऊपर चढ़ना पड़ता है। इन सभी कारणों से वॉल्व्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और जब वे ठीक से काम नहीं कर पाते, तब वैरिकोज़ वेन्स विकसित हो जाती हैं।
क्या वैरिकोज़ वेन्स खतरनाक होती हैं?
वैरिकोज़ वेन्स होना आम बात है और ज़्यादातर मामलों में यह जानलेवा नहीं होती। कई लोग इसे देखकर डर जाते हैं और सोचते हैं कि कहीं खून का थक्का न बन जाए या कोई गंभीर खतरा न हो। हालांकि, वैरिकोज़ वेन्स में खून के बहाव में थोड़ी रुकावट आती है, जिससे थक्का बनने का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है। लेकिन सही सावधानी और देखभाल से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह समस्या जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है, लेकिन आमतौर पर यह जान के लिए खतरा नहीं बनती।
किन लोगों में वैरिकोज़ वेन्स का खतरा ज़्यादा होता है?
-जिन लोगों को लंबे समय तक खड़े रहकर काम करना पड़ता है
-बार-बार प्रेग्नेंसी होने पर
-मोटापे से ग्रसित लोगों में
-स्मोकिंग करने वालों में
वैरिकोज़ वेन्स से बचाव और इलाज
-जो लोग हाई-रिस्क कैटेगरी में आते हैं, उन्हें खास ध्यान रखना चाहिए।
-लाइफस्टाइल को बेहतर बनाएं
-रोज़ाना थोड़ी देर टहलने की आदत डालें
-चलने से पिंडलियों की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जिससे खून ऊपर की ओर बहने में मदद मिलती है
-पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
-कम पानी पीने से खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे थक्का जमने का खतरा बढ़ जाता है
-इतना पानी पिएं कि यूरिन साफ़ दिखाई दे
अगर लक्षण नज़र आ रहे हों या आपका काम ऐसा हो जिसमें ज़्यादा देर खड़ा रहना पड़ता है, तो कंप्रेशन स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। सही साइज़ और सही ग्रेड की स्टॉकिंग्स पहनना ज़रूरी होता है। जिन लोगों को पहले से वैरिकोज़ वेन्स हैं, वे इलाज के विकल्पों के बारे में जानकारी ले सकते हैं।
आज के समय में इसका इलाज काफी आसान हो चुका है। लेज़र या विशेष तकनीक के ज़रिए बिना बड़े ऑपरेशन के इलाज संभव है। यह धारणा गलत है कि वैरिकोज़ वेन्स की सर्जरी बहुत जटिल होती है। अधिकतर मामलों में मरीज़ खुद चलकर इलाज के लिए जाता है और इलाज के बाद भी सामान्य रूप से चल सकता है। न बेहोशी की ज़रूरत होती है, न ICU की। अगले ही दिन से रोज़मर्रा के काम शुरू किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, वैरिकोज़ वेन्स को नज़रअंदाज़ भी नहीं करना चाहिए और न ही बेवजह डरना चाहिए। अगर पैरों में ऐसी नसें दिखाई दें या तकलीफ़ महसूस हो, तो समय रहते सलाह लेकर सही कदम उठाना ही सबसे बेहतर तरीका है।
Medical Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और सामान्य चिकित्सा ज्ञान पर आधारित है। किसी भी बीमारी, लक्षण या उपचार को अपनाने से पहले अपने चिकित्सक या विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है। लेखक या वेबसाइट किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगी।


