बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला जशोर जिले का है, जहां राणा प्रताप नाम के एक व्यक्ति की अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना ने एक बार फिर देश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राणा प्रताप जशोर जिले के मनीरामपुर इलाके के कोपलिया बाजार में पिछले दो साल से बर्फ का कारखाना चला रहे थे। इसके अलावा, वह एक स्थानीय अखबार के संपादक भी थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वारदात सोमवार, 5 जनवरी की शाम करीब 5:45 बजे हुई। बताया गया है कि कुछ लोग उन्हें कारखाने से बाहर बुलाकर ले गए और वहां उन पर गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
राणा प्रताप, तुषार कांति बैरागी के बेटे थे और केशबपुर उप-जिले के अरुआ गांव के रहने वाले थे। गोलीबारी की घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही मनीरामपुर पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। मनीरामपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी राजिउल्लाह खान ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, हालांकि अभी तक हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है।
इस बीच, एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राणा प्रताप के खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज थे और उन पर कथित तौर पर कुछ कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े होने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों और हत्या के बीच किसी तरह के सीधे संबंध की पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की कई घटनाएं हाल के महीनों में दर्ज की गई हैं। दिसंबर में एक हिंदू विधवा के साथ बलात्कार की घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था। इसके अलावा, हिंदू समुदाय से जुड़े कई लोगों की हत्या के मामले भी सामने आए हैं।
अब तक मिली जानकारी के अनुसार, हालिया हिंसा के दौरान हिंदू समुदाय के कम से कम पांच लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कपड़ा कारखाने में काम करने वाले दीपू चंद्र दास शामिल हैं, जिनकी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा अमृत मंडल, बजेन्द्र बिस्वास और खोकन दास की हत्याओं को भी इसी सिलसिले में देखा जा रहा है।
इन घटनाओं के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े दावों पर सवाल उठने लगे हैं। सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस लगातार यह कहते रहे हैं कि अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा दी जा रही है, लेकिन हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इन घटनाओं पर क्या ठोस कदम उठाती है और क्या दोषियों को जल्द न्याय के दायरे में लाया जा सकेगा।


