भारतीय विमानन कंपनी एयर इंडिया इस बात को स्वीकार कर चुकी है कि उसका एक Airbus A320 विमान एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) के बिना कई बार उड़ान भर चुका है। इस गंभीर चूक के सामने आने के बाद डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। एयर इंडिया ने सफाई देते हुए कहा है कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। एयरलाइन ने अपने स्तर पर भी आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
कैसे खुला मामला?
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित Airbus A320 विमान ने नवंबर 2025 में कई बार ऐसी उड़ानें भरीं, जिनके लिए जरूरी ARC वैध नहीं था। DGCA का कहना है कि ARC हर साल विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड, तकनीकी हालत और एयरवर्दीनेस स्टैंडर्ड्स की पुष्टि के बाद जारी किया जाता है। यह सर्टिफिकेट विमान के मुख्य Certificate of Airworthiness (C of A) को वैध बनाए रखता है।
विस्तारा–एयर इंडिया मर्जर में हुई तकनीकी गड़बड़ी
DGCA ने बताया कि विस्तारा और एयर इंडिया के मर्जर के दौरान तय हुआ था कि विस्तारा के सभी 70 विमानों का पहला ARC नवीनीकरण DGCA खुद करेगा। इनमें से 69 विमानों को ARC जारी भी कर दिया गया था।
हालांकि 70वें विमान का मामला अलग निकला—
एयरलाइन ने DGCA में ARC के लिए आवेदन किया, उसके बाद विमान को इंजन बदलने के लिए ग्राउंड कर दिया गया, इसी दौरान ARC की वैधता समाप्त हो गई, लेकिन इंजन बदलने के बाद विमान को बिना वैध ARC के ही उड़ानों के लिए भेज दिया गया।
कितनी उड़ानें हुईं?
एयर इंडिया ने DGCA को 26 नवंबर 2025 को सूचित किया कि विमान 8 रेवेन्यू सेक्टर में एक्सपायर ARC के साथ उड़ चुका है। DGCA ने तुरंत जांच शुरू की और विमान को फिर से ग्राउंड करने का आदेश दिया। जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारियों को तत्काल डी-रोस्टर कर दिया गया है।
एयर इंडिया की सफाई
एयरलाइन ने बयान जारी कर कहा— “हम अपने संचालन में उच्चतम मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बिना ARC के विमान के ऑपरेशन की घटना बेहद खेदजनक है। जैसे ही यह मामला सामने आया, संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया और DGCA को इसकी जानकारी दी गई।” एयर इंडिया का कहना है कि यह एक प्रक्रियागत चूक है और ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।
एयरवर्दीनेस सर्टिफिकेट क्यों जरूरी?
DGCA के एयरवर्दीनेस प्रोसीजर मैनुअल में स्पष्ट है कि किसी भी विमान को उड़ान भरने से पहले—
उसका एयरवर्दीनेस सर्टिफिकेट मान्य होना चाहिए, यह सर्टिफिकेट DGCA मुख्यालय द्वारा विस्तृत निरीक्षण के बाद जारी किया जाता है,
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान उड़ान योग्य और सुरक्षित स्थिति में है। एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के मुताबिक बिना वैध एयरवर्दीनेस सर्टिफिकेट के कोई भी विमान उड़ान नहीं भर सकता। ऐसे में एयर इंडिया का यह मामला सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
– ईशा गर्ग


