इन दिनों एक अजीब सी परेशानी कई लोगों को परेशान कर रही है—और दिलचस्प बात ये है कि समस्या सच में गले से ही जुड़ी है। सुबह उठते ही गले में खिंचाव-सा महसूस होता है, सूखापन रहता है और खांसी भी आ जाती है। ज़्यादातर लोग इसे मामूली ठंड या मौसम बदलाव समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन अगर ऐसा बार-बार होने लगे तो इसके पीछे सिर्फ मौसम नहीं, कुछ और कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग नाक की बजाय मुंह से सांस लेने की आदत रखते हैं। रात में सोते समय भी उनका मुंह खुला रहता है। ऐसी स्थिति में हवा सीधे गले तक पहुंचती है और वहाँ मौजूद नमी को सोख लेती है। इसी वजह से जागते ही गला सूखा हुआ महसूस होता है। जब सर्दी-जुकाम के दौरान नाक बंद हो जाती है, तब भी लोग मजबूरन मुंह से सांस लेते हैं, जिससे रातभर में गला और अधिक ड्राई हो जाता है।
सर्द मौसम में पानी कम पीने की आदत भी गले के सूखने की बड़ी वजह बनती है। शरीर में पानी की कमी होने पर नमी घटती है और इसका असर सबसे पहले गले पर दिखाई देता है—खासतौर पर सुबह-सुबह। इसके अलावा, जो लोग सर्दियों में रूम हीटर या गर्मियों में एसी चलाकर सोते हैं, उनके कमरे की हवा में नमी काफी कम हो जाती है। ड्राई हवा गले की म्यूकस मेम्ब्रेन को सुखा देती है। यह वही झिल्ली है जो शरीर के अंदरूनी हिस्सों को सुरक्षित रखती है, उन्हें नम बनाए रखती है और बैक्टीरिया-वायरस के हमले से बचाती है।
खर्राटे लेने वाले या स्लीप एपनिया के मरीजों में भी मुंह और गले का सूखना ज्यादा देखा जाता है। वहीं, अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां प्रदूषण ज्यादा है और खिड़कियां खोलकर सोते हैं, तो हवा में मौजूद छोटे-छोटे प्रदूषक कण सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे गले का सूखापन और बढ़ सकता है।
शराब और सिगरेट का सेवन करने वालों के गले में मौजूद म्यूकस मेम्ब्रेन को भी नुकसान पहुंचता है। यह झिल्ली कमजोर होकर सूख जाती है और अपनी नमी खो देती है, जिससे गले में लगातार ड्राईनेस बनी रहती है। इसीलिए इन आदतों से दूर रहना ही बेहतर है।
जिन लोगों को नींद में मुंह खुला रह जाता है, वे ‘माउथ टेपिंग’ जैसी तकनीक आज़मा सकते हैं। इसमें मुंह पर हल्का टेप लगाकर सोया जाता है, ताकि व्यक्ति पूरी रात नाक से सांस ले सके। अगर समस्या नाक बंद होने की है तो भाप लेना या नेज़ल स्प्रे उपयोग करना राहत दे सकता है।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद ज़रूरी है—कम से कम दो लीटर। हीटर का लगातार उपयोग करने से बचें। कुछ समय चलाकर उसे बंद कर दें। यदि हीटर में ह्यूमिडिफायर लगा है तो और भी अच्छा, क्योंकि इससे कमरे में नमी बनी रहती है। और अगर ऐसा फीचर मौजूद नहीं है, तो हीटर के पास पानी से भरी बाल्टी रख देने से भी हवा में नमी बढ़ जाती है और सूखापन कम होता है। अगर समस्या स्लीप एपनिया जैसी किसी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।


