एक दिन पहले बिहार में जेडीयू कार्यकर्ताओं ने पटना स्थित पार्टी ऑफिस समेत कई जगहों पर पोस्टर लगाए, जिन पर लिखा था—“टाइगर अभी जिंदा है।” यह ‘टाइगर’ किसी और के लिए नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के लिए कहा गया, जो 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने की दहलीज पर खड़े दिख रहे हैं। चुनाव नतीजों में NDA लगभग 200 सीटों के आंकड़े को पार करता दिख रहा है, जो 2010 के नतीजों की लगभग पुनरावृत्ति जैसा है।
कुछ महीने पहले तक बिहार की राजनीति में ‘भारी एंटी-इंकम्बेंसी’ की चर्चाएं थीं। नीतीश कुमार के स्वास्थ्य पर सवाल उठाए जा रहे थे, और आपराधिक घटनाओं के सहारे ‘नए जंगलराज’ का नैरेटिव हवा पकड़ रहा था। लेकिन अंतिम नतीजों ने सारे अनुमानों को उलट दिया। आखिर क्या बदला? किन वजहों ने नीतीश और NDA को इतनी बड़ी जीत दिलाई? आइए समझते हैं।
- योजनाओं की बौछार — हर वर्ग को साधने की रणनीति
पिछले एक साल से भी कम समय में बिहार सरकार ने 20 से अधिक कल्याणकारी योजनाओं का ऐलान किया। इनका दायरा इतना व्यापक था कि समाज का लगभग हर तबका इससे जुड़ गया—महिलाएं, युवा, बुजुर्ग, दिव्यांग, लगभग सभी। पूरे राज्य को कवर करने वाली 125 यूनिट फ्री बिजली योजना महिलाओं को आर्थिक मज़बूती देने वाली 10,000 रुपये सहायता योजना, जिसे लेकर चुनाव के दौरान सबसे अधिक चर्चा हुई विधवा, वृद्ध और विकलांग पेंशन में बढ़ोतरी बेरोजगार युवाओं के लिए राहत
जीविका दीदियों के लिए सस्ता लोन रिपोर्ट्स के अनुसार, इन योजनाओं ने NDA के पक्ष में माहौल बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। - ‘M’ फैक्टर – महिलाएं बनीं NDA की रीढ़
2016 में लागू शराबबंदी ने महिलाओं का एक मजबूत समर्थन नीतीश कुमार के साथ जोड़ दिया था। आलोचनाओं के बावजूद मुख्यमंत्री अपने फैसले पर कायम रहे। चुनावी साल में महिलाओं के लिए नई योजनाओं ने इस समर्थन को कई गुना बढ़ा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक— 75 लाख से ज्यादा महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता जीविका दीदियों के लिए आसान लोन सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण पंचायत व निकाय चुनावों में 50% आरक्षण आंगनबाड़ी सेविकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी इतिहास रचते हुए इस बार 71% से ज्यादा महिला मतदाताओं ने मतदान किया, जो पुरुषों से लगभग 9% अधिक है। विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं की यह बड़ी लामबंदी NDA के सत्ता में लौटने की सबसे बड़ी वजहों में शामिल है। - बेदाग छवि — नीतीश का सबसे बड़ा पूंजी
करीब 20 वर्षों से राजनीति के केंद्र में रहने के बावजूद नीतीश कुमार की व्यक्तिगत छवि अब भी बेदाग मानी जाती है।
हालांकि उन्होंने पिछले दस साल में चार बार राजनीतिक पलटी ली, लेकिन उनकी ईमानदार और साफ-सुथरी छवि पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्ष के लगातार स्वास्थ्य संबंधी आरोपों ने नीतीश को नुकसान पहुंचाने की बजाय उनके प्रति सहानुभूति बढ़ा दी। इससे NDA की पकड़ और मजबूत हो गई। - ‘जंगलराज’ बनाम ‘सुशासन’ — पुराना नैरेटिव फिर चला
लालू यादव के कार्यकाल को एक तरफ सामाजिक न्याय के दौर के रूप में याद किया जाता है, तो दूसरी तरफ इसे अपराध और अराजकता के समय के रूप में भी चित्रित किया गया। इस ‘जंगलराज’ नैरेटिव को दोबारा जिलाने का काम NDA ने पूरे अभियान में किया। रैलियों से लेकर स्थानीय सभाओं तक—“जंगलराज की वापसी” का संदेश बार-बार दोहराया गया। दूसरी तरफ नीतीश को ‘सुशासन बाबू’ के रूप में प्रोजेक्ट किया गया। युवा नेता तेजस्वी यादव ने इस छवि को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन असर सीमित रहा। विश्लेषण के अनुसार, डर बनाम स्थिरता की इस लड़ाई में लोग स्थिरता की ओर झुक गए। - जातीय समीकरण — NDA का सबसे मजबूत फॉर्मूला
बिहार में NDA ने इस बार अपनी सामाजिक और जातीय इंजीनियरिंग को बेहद सटीक तरीके से साधा।
ब्राह्मण–बनिया–भूमिहार: पारंपरिक रूप से बीजेपी के समर्थक
कुर्मी–कोइरी–अति पिछड़ा वर्ग: जेडीयू का स्थायी आधार
पासवान समुदाय: LJP(RV) का प्रभाव
महादलित: मांझी का दावा
कुशवाहा समुदाय: RLSP का प्रभाव
हालांकि सीट बंटवारे पर नाराज़गी, बयानबाज़ी और मनमुटाव देखने को मिले, लेकिन अंततः सभी दलों को साथ जोड़कर NDA ने बड़ा गठबंधन तैयार किया। रिपोर्ट्स बताते हैं कि शीर्ष नेताओं ने व्यक्तिगत नाराज़गी से ऊपर उठकर जीत को प्राथमिकता दी।
- संगठन की आक्रामक ग्राउंड स्ट्रैटेजी
अंतिम चरणों में बीजेपी ने अपने संगठन को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतार दिया। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी गांव-गांव पहुंचे। दूसरे राज्यों से आए कार्यकर्ताओं ने भी भूमिकाएं निभाईं। विश्लेषकों के अनुसार, यही जमीनी मेहनत BJP को 90 से ज्यादा सीटों की ओर ले जाती दिख रही है।
चुनाव नतीजे बताते हैं कि — योजनाओं की बाढ़, महिला मतदाताओं का अभूतपूर्व समर्थन, नीतीश की बेदाग छवि, जंगलराज बनाम सुशासन का नैरेटिव, जातीय गणित और NDA की आक्रामक ग्राउंड स्ट्रैटेजी। इन सभी ने मिलकर NDA के लिए लैंडस्लाइड जीत का रास्ता तैयार किया।


