राम आएंगे तो दीप जलाएंगे, राम आएंगे तो दिवाली मनाएंगे.. जी हां 22 जनवरी को पूरे भारत में दिवाली ही मनाई जाने वाली है। अयोध्या में होने वाले राम मंदिर के उद्घाटन को खास बनाने के लिए पुरजोर कोशिशें की जा रही हैं। देश के हर कोने में लोग भगवान राम के आने की उत्सुकता को अलग-अलग ढंग से जाहिर कर रहे हैं। रामलला की मूर्ति को आसन पर स्थापित कर दिया गया है और अब उनकी पहली तस्वीर भी सामने आ गई है। इससे पहले मकर संक्रांति (15 जनवरी) को राम मंदिर में स्थापित की जाने वाली रामलला की मूर्ति का भी चयन कर लिया गया। भारत के संसदीय मामलों के केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने खुद अपने एक्स अकाउंट पर इसकी जानकारी दी थी।
उन्होंने एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि, “जहां राम हैं, वहां हनुमान हैं। अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मूर्ति का चयन फाइनल हो गया है। हमारे देश के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार, हमारे गौरव अरुण योगीराज के द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति अयोध्या में स्थापित की जाएगी। यह राम हनुमान के अटूट रिश्ते का एक और उदाहरण है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हनुमान की भूमि कर्नाटक से रामलला के लिए यह एक महत्वपूर्ण सेवा है.”
अब कई लोगों के मन में सवाल है कि इस मूर्ति को बनाने वाले मूर्तिकार अरूण योगीराज शिल्पी आखिर हैं कौन ? दरअसल, 2008 में मैसूर विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई पूरी कर चुके 37 वर्षीय अरुण योगीराज कर्नाटक के मैसूर जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता योगीराज शिल्पी भी कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं। वहीं उनके पिता की मानें तो अरूण की 5 पीढ़ियां मूर्ति तराशने का काम करती आ रही हैं। लेकिन बतौर मूर्तिकार अरूण ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हालांकि शुरूआत में उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की थी, मगर वो ज्यादा वक्त तक अपने अंदर छिपे मूर्तिकार को रोक नहीं पाए। बाद में विरासत में मिली इस कला को उन्होंने आगे बढ़ाया। अब उन्हें देश के सबसे प्रसिद्ध मूर्तिकारों में से एक माना जाता है। खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अरूण की कला को लेकर उनकी सराहना कर चुके हैं।
बात करें अरूण की कुशलता की, तो उन्होंने रामलला की मूर्ति के अलावा भी कई प्रसिद्ध मूर्तियों को तराशा है। जिनमें इंडिया गेट पर लगी 30 फीट ऊंची सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति भी शामिल है। इसके अलावा केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फीट ऊंची प्रतिमा, मैसूर में स्वामी रामकृष्ण परमहंस की सफेद अमृतशिला प्रतिमा समेत कई बड़ी मूर्तियों को तराशने का काम अरूण योगीराज द्वारा किया गया है।