गणेश चतुर्थी पर आइए जानें एक अद्भुत मंदिर के बारे में – जहां भगवान गणेश 32 अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं! गणेश चतुर्थी का पर्व आते ही हर जगह गणपति बाप्पा मोरया की गूंज सुनाई देने लगती है। भारत में भगवान गणेश के अनेक मंदिर हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मैसूर (कर्नाटक) में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां भगवान गणेश 32 विशेष रूपों में विराजते हैं?
यह मंदिर कर्नाटक के नंजनगुड शहर में स्थित है, जो कि मैसूर से सिर्फ 27 किलोमीटर दूर, काबिनी नदी के किनारे बसा हुआ है। वैसे तो यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन यहां भगवान गणेश के दुर्लभ 32 स्वरूप भी दर्शन के लिए उपलब्ध हैं। इस मंदिर को कर्नाटक के सबसे बड़े और पवित्र स्थलों में गिना जाता है।
मंदिर परिसर में 100 से भी अधिक देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हैं और हर मूर्ति में बारीकी से की गई नक्काशी देखते ही बनती है। गणेश जी के इन 32 स्वरूपों का वर्णन मुद्गल पुराण और गणेश पुराण में भी मिलता है।
आइए जानते हैं गणेश जी के इन 32 अद्भुत रूपों के बारे में:
भगवान गणेश के 32 अद्वितीय स्वरूप:
1. बाल गणपति – भगवान का बाल स्वरूप, जिसे गणेश चतुर्थी पर विशेष रूप से पूजा जाता है।
2. तरुण गणपति – किशोर रूप में, लाल आभा से चमकते हुए।
3. भक्त गणपति – श्वेतवर्ण वाले, पूर्णिमा के चंद्रमा जैसे चमकते।
4. वीर गणपति – योद्धा रूप में, 16 भुजाओं के साथ, साहस का प्रतीक।
5. शक्ति गणपति – चार भुजाओं में से एक से भक्तों को आशीर्वाद देते हुए।
6. द्विज गणपति – ज्ञान और संपत्ति के दाता।
7. सिद्धि गणपति – पीतवर्ण में, सफलता और बुद्धि के प्रतीक।
8. उच्छिष्ट गणपति – नीलवर्ण, धान्य के देवता और ऐश्वर्य का प्रतीक।
9. विघ्न गणपति – स्वर्णवर्ण, बाधाओं को दूर करने वाले।
10. क्षिप्र गणपति – रक्तवर्ण, जल्दी प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
11. हेरम्ब गणपति – पाँच सिर और शेर की सवारी, दुर्बलों के रक्षक।
12. लक्ष्मी गणपति – आठ भुजाओं के साथ, समृद्धि और बुद्धि के प्रतीक।
13. महागणपति – तीन नेत्रों वाले, शक्ति के साथ विराजमान।
14. विजय गणपति – विशाल मूषक पर सवार, विजयी रूप।
15. नृत्य गणपति – कल्पवृक्ष के नीचे नृत्य करते हुए।
16. ऊर्ध्व गणपति – आठ भुजाओं के साथ, शक्ति के साथ विराजमान।
17. एकाक्षर गणपति – तीन नेत्रों वाले, मस्तक पर चंद्रमा के साथ।
18. वर गणपति – रत्न कुंभ धारण किए, वरदान देने वाले।
19. त्र्यक्षर गणपति – “ॐ” रूप में, ब्रह्मा-विष्णु-महेश का संगम।
20. क्षिप्रप्रसाद गणपति – इच्छाएं शीघ्र पूरी करने वाले।
21. हरिद्रा गणपति – हल्दी से बने, राजसिंहासन पर विराजमान।
22. एकदंत गणपति – विशाल उदर, ब्रह्मांड समाहित किए हुए।
23. सृष्टि गणपति – प्रकृति की सभी शक्तियों के प्रतिनिधि।
24. उद्दंड गणपति – उग्र रूप में, 12 हाथों के साथ न्यायकर्ता।
25. ऋणमोचन गणपति – कर्ज और अपराधबोध से मुक्ति देने वाले।
26. ढुण्ढि गणपति – रुद्राक्ष माला और लाल रत्न-पात्र धारण किए हुए।
27. द्विमुख गणपति – दो मुखों के साथ, सभी दिशाओं पर दृष्टि रखते हैं।
28. त्रिमुख गणपति – तीन मुखों और छह भुजाओं के साथ, स्वर्ण कमल पर।
29. सिंह गणपति – शेर जैसे मुख और स्वरूप में विराजमान।
30. योग गणपति – योगिक मुद्रा में ध्यानस्थ।
31. दुर्गा गणपति – अदृश्य शक्ति के रूप में, अजेय और अंधकार नाशक।
32. संकष्टहरण गणपति – संकटों को हरने वाले, भय और दुख से मुक्ति देने वाले।
क्यों खास है यह मंदिर?
यह मंदिर ना सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय है, बल्कि कला और शिल्प के प्रेमियों के लिए भी एक अद्भुत स्थल है। भगवान गणेश के इतने विविध और अलौकिक स्वरूप एक ही जगह देखना एक दुर्लभ अनुभव है। यह मंदिर गणेश भक्तों के लिए एक अनमोल धरोहर की तरह है।
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