आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी हमारी सेहत पर सीधा असर डाल रही है। मोटापा, फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की समस्या और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों की जड़ कहीं न कहीं हमारी डाइट ही बनती जा रही है।
लोग जंक फूड तो बेझिझक खा रहे हैं, लेकिन एक्सरसाइज और संतुलित भोजन से दूरी बना ली है। ऐसे में दिल की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। अच्छी बात यह है कि दिल को स्वस्थ रखने का सबसे आसान रास्ता हमारी रसोई से होकर गुजरता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल को दिल की बीमारियों की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। खासतौर पर भारतीयों में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर अपेक्षाकृत ज्यादा देखा जाता है। यही कारण है कि कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखना हमारे लिए और भी जरूरी हो जाता है।
क्या आप जानते हैं कि किचन में मौजूद एक साधारण-सी चीज दिल को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है? हालिया रिसर्च के अनुसार, अगर सिर्फ दो दिन तक एक खास तरह का हेल्दी नाश्ता किया जाए, तो कोलेस्ट्रॉल में तेजी से गिरावट देखी जा सकती है।
स्टडी में क्या सामने आया?
रिसर्च में मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे कुछ लोगों को शामिल किया गया। नतीजों से पता चला कि ओटमील यानी जई का दलिया खाने से महज 48 घंटे के भीतर खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) में लगभग 10 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। हैरानी की बात यह रही कि इसका असर कई हफ्तों बाद भी बना रहा, जबकि लोग वापस अपनी सामान्य डाइट पर लौट चुके थे।
मेटाबॉलिक सिंड्रोम क्या है?
मेटाबॉलिक सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कई स्वास्थ्य समस्याएं एक साथ शरीर को प्रभावित करती हैं, जिससे हार्ट डिजीज, डायबिटीज और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसमें शामिल हैं—
बढ़ा हुआ वजन
हाई ब्लड प्रेशर
हाई ब्लड शुगर
ज्यादा कोलेस्ट्रॉल
इन सभी कारणों से दिल की बीमारी और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
ओटमील डाइट कैसे अपनाई गई?
रिसर्च के दौरान लोगों को दो ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप को दो दिन तक दिन में तीन बार सिर्फ ओटमील खाने को कहा गया। ओट्स को पानी में उबालकर दिया गया था, जिसमें थोड़ी मात्रा में फल या सब्जी मिलाने की अनुमति थी। इस दौरान रोजाना करीब 300 ग्राम ओट्स खाए गए और कुल कैलोरी सामान्य डाइट से लगभग आधी रखी गई।
दूसरे ग्रुप ने भी कैलोरी कम की, लेकिन उन्हें ओट्स शामिल करने की अनुमति नहीं थी। दोनों ग्रुप्स को कैलोरी कम करने से फायदा हुआ, लेकिन ओटमील डाइट अपनाने वालों में असर ज्यादा स्पष्ट नजर आया।
क्या फायदे दिखे?
48 घंटे में खराब कोलेस्ट्रॉल में करीब 10% की कमी
औसतन 2 किलो तक वजन घटा
ब्लड प्रेशर में हल्का सुधार
यह तरीका दवाओं जितना तेज असर भले न दिखाए, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित और नेचुरल माना जाता है।
ओट्स शरीर में कैसे असर करता है?
ओटमील खाने से आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ती है। ये बैक्टीरिया ओट्स को पचाकर ऐसे तत्व बनाते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। साथ ही, यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में भी सहायक हो सकता है, जो डायबिटीज की एक बड़ी वजह है।
कब मिलता है ज्यादा फायदा?
रिसर्च के मुताबिक, कम समय में ज्यादा मात्रा में ओट्स खाने से बेहतर परिणाम देखने को मिले। रोज थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ओट्स खाने से कोलेस्ट्रॉल पर उतना खास असर नहीं पड़ा। यानी, दो दिन की सख्त ओटमील डाइट ज्यादा असरदार साबित हुई।
अगर हर छह हफ्ते में दो दिन तक ओटमील डाइट अपनाई जाए, तो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखने और डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।


