सुबह घर से निकला एक बिल्कुल स्वस्थ दिखने वाला युवा… ऑफिस पहुंचने से पहले ही सीने में दर्द की शिकायत करता है, कुछ ही मिनटों में जमीन पर गिर जाता है और फिर खबर आती है हार्ट अटैक। ऐसी घटनाएं अब दुर्लभ नहीं रहीं। सबसे चिंता की बात यह है कि 25–30 साल के लोग, जिन्हें उम्र के हिसाब से सबसे फिट माना जाता है, वही अब दिल और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार बनते जा रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में कम उम्र में हार्ट अटैक और टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। पहले ये बीमारियां 45–50 वर्ष के बाद आम मानी जाती थीं, लेकिन अब 20–40 वर्ष की आयु में भी तेजी से दिखाई देने लगी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बदलती जीवनशैली है। आज का युवा शारीरिक रूप से कम और मानसिक रूप से ज्यादा काम करता है। दिन के 8–10 घंटे कुर्सी पर बैठना, ऑफिस के बाद भी मोबाइल या लैपटॉप पर समय बिताना और व्यायाम का अभाव शरीर के ऊर्जा संतुलन को बिगाड़ देता है। अतिरिक्त कैलोरी पेट की चर्बी में बदल जाती है, जो अंदरूनी अंगों के आसपास जमा होकर हार्मोनल गड़बड़ी पैदा करती है।
खान-पान की आदतों में बदलाव भी बड़ा कारण है। फास्ट फूड, प्रोसेस्ड स्नैक्स, ज्यादा नमक-चीनी और मीठे पेय पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। शरीर बार-बार इंसुलिन बनाता है, जिससे समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो जाता है और यही आगे चलकर डायबिटीज का रूप ले लेता है।
लगातार तनाव भी युवाओं के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है। नौकरी का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां और प्रतिस्पर्धा शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर, फैट और शुगर तीनों बढ़ते हैं। इसके साथ-साथ नींद की कमी समस्या को और गंभीर बना देती है। देर रात तक स्क्रीन देखने और अनियमित दिनचर्या से शरीर की मरम्मत प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे मोटापा, हाई बीपी और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।
धूम्रपान और शराब का सेवन भी कम उम्र में दिल की बीमारियों को बढ़ावा देता है। सिगरेट रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और धमनियों में प्लाक जमा होने लगता है, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभाते हैं, लेकिन खराब जीवनशैली इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है।
समस्या यह भी है कि शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं थकान, हल्का सीने में दबाव, सांस फूलना या बार-बार प्यास लगना इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आज कम उम्र अब सुरक्षा की गारंटी नहीं रही। हमारा शरीर हमारी रोजमर्रा की आदतों का हिसाब रखता है। यदि अभी ध्यान न दिया जाए, तो भविष्य में इ सकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही लंबी और सुरक्षित जिंदगी की सबसे मजबूत नींव है।


