हिंदू धर्म में रामायण का विशिष्ट महत्व है। हम में से अधिकतर लोगों ने रामायण पढ़ी होगी, वहीं कईयों ने सुनी या देखी तो जरूरी होगी। कुल मिलाकर रामायण की कहानी तो हर किसी को मालूम है। हालांकि रामायण से जुड़े कई पहलू, कई किस्से ऐसे हैं। जिनके बारे में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। इन्हीं किस्सों में से एक है, लक्ष्मण जी की नींद से जुड़ा किस्सा। जिसकी वजह से उन्हें गुडाकेश के नाम से भी जाना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि वनवास के 14 वर्षों के दौरान लक्ष्मण जी को हर पहर बड़े भाई और भाभी की रक्षा की चिंता रहती थी। जिसके चलते वो रात के समय भी नहीं सोते थे। और यही कारण भी रहा कि उन्हें गुडाकेश का नाम मिला। गुडाकेश अथार्त् वो व्यक्ति जिसने निद्रा पर नियंत्रण पा लिया हो। महाभारत में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को भी गुडाकेश के नाम से कई बार संबोधित किया गया है।
पौराणिक कथाएं कहती हैं, वनवास की पहली रात को जब राम और सीता सो रहे थे। तब लक्ष्मण के सामने निद्रा देवी प्रकट हुईं और उसी समय लक्ष्मण ने निद्रा देवी से उन्हें ऐसा वरदान देने का अनुरोध किया कि उन्हें वनवास काल के 14 वर्षों के दौरान नींद ना आए और वो निश्चिंत अपने भाई राम और भाभी सीता की रक्षा कर सकें। निद्रा देवी लक्ष्मण की बात सुनकर प्रसन्न तो हुईं मगर उन्होंने लक्ष्मण से पूछा कि उनके बदले की नींद इन 14 वर्षों के दौरान कौन पूरी करेगा ? इसके जवाब में लक्ष्मण ने निद्रा देवी को अपनी पत्नी उर्मिला के पास भेज दिया। उर्मिला ने लक्ष्मण के बदले सोना स्वीकार किया। कहते हैं कि वनवास के दौरान जब लक्ष्मण 14 वर्षों तक जाग रहे थे तब उनके स्थान पर उनकी पत्नी उर्मिला 14 सालों तक सोती रहीं।
एक कथा के अनुसार, अपने इसी वरदान के चलते लक्ष्मण ने 14 वर्षों तक जिस क्षण का इंतजार किया था। वह उसी के साक्षी नहीं बन सके थे। दरअसल, निद्रा देवी ने लक्ष्मण को वरदान देते हुए कहा था कि वो 14 वर्षों तक उन्हें परेशान नहीं करेंगी, लेकिन जैसे ही उनका वनवास काल पूरा होगा और वो अयोध्या लौट आएंगे। वैसे ही उनके स्थान पर सो रही उर्मिला की नींद टूट जाएगी एवं लक्ष्मण को सोना होगा। माना जाता है कि इस शर्त के चलते भगवान राम के राज तिलक के दौरान लक्ष्मण सो रहे थे। उनके स्थान पर ये रस्म उनकी पत्नी उर्मिला ने देख रहीं थी।