भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी का नाम एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय विवादों में घिर गया है। 2023 की शुरुआत में अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने अडानी समूह को हिलाकर रख दिया था। अब एक नए मामले में अमेरिकी एजेंसियों ने गौतम अडानी और उनकी कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के इस मामले ने शेयर बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। तो चलिए आपको बताते हैं इस मामले के मुख्य पहलू, आरोपों की गहराई, और यह क्यों भारत और अमेरिका के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
शुरुआत करते हैं आरोपों से… आखिर क्या हैं आरोप?
न्यूयॉर्क की एक फेडरल कोर्ट ने गौतम अडानी और उनकी कंपनी पर सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए रिश्वत देने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। यानि रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अडानी ग्रीन एनर्जी ने सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के लिए भारतीय अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर (करीब 2110 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी।
एक और आरोप है निवेशकों को गुमराह करना: अमेरिकी बैंकों और निवेशकों से सच्चाई छिपाई गई। अडानी ग्रीन एनर्जी पर झूठे बयान देकर निवेशकों से 3 बिलियन डॉलर जुटाने का आरोप है।
प्रोजेक्ट विवाद: 12 गीगावाट सोलर एनर्जी का यह प्रोजेक्ट सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) से जुड़ा है, जिसके लिए अडानी समूह पर अनुचित साधनों का उपयोग करने का आरोप है।
विवाद का इतिहास : रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच अडानी ग्रीन और एज्योर पावर नामक कंपनियों ने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देकर SECI से कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। यह डील 2 बिलियन डॉलर के संभावित मुनाफे के लिए की गई थी। अमेरिकी एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि अडानी समूह ने इस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी निवेशकों का पैसा इस्तेमाल कर कानून का उल्लंघन किया या नहीं।
इस मामले में कई बड़े नामों का उल्लेख किया गया है:
गौतम अडानी: अडानी समूह के चेयरमैन।
सागर अडानी: गौतम अडानी के भतीजे और अडानी ग्रीन एनर्जी में महत्वपूर्ण पद पर।
विनीत जैन: अडानी ग्रीन एनर्जी के सीनियर अधिकारी।
एज्योर पावर के अधिकारी: CEO रंजीत गुप्ता और अन्य अधिकारियों पर भी आरोप लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन लोगों ने मिलकर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए रिश्वत देने और निवेशकों को गुमराह करने की साजिश रची।
अमेरिकी एजेंसियां क्यों कर रही हैं जांच?
अमेरिकी सिक्योरिटीज और एक्सचेंज कमीशन (SEC) और अटॉर्नी ऑफिस ने यह मामला इसलिए उठाया क्योंकि इसमें अमेरिकी निवेशकों का पैसा शामिल था। अमेरिकी कानून के तहत, अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी अपराध माने जाते हैं। अडानी समूह ने इनवेस्टर्स से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल गलत तरीके से किया, जिससे अमेरिकी निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
अडानी समूह का पक्ष : अडानी समूह ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। कंपनी का कहना है कि वह कानून का पालन करती है और सभी आरोपों के खिलाफ कानूनी कदम उठाएगी। गौतम अडानी ने बयान जारी कर निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उनकी कंपनी पारदर्शी तरीके से काम करती है और हर आरोप का जवाब पेश किया जाएगा।
इस विवाद के बाद भारतीय राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने अडानी समूह पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस, संयुक्त संसदीय समिति (JPC) जांच की मांग कर रही है। वहीं शिवसेना (UBT) पार्टी ने कहा है कि यह मामला देश की साख पर सवाल खड़ा करता है। अन्य दल के विपक्षी नेताओं ने अडानी की गिरफ्तारी और मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।
अडानी समूह की मुश्किलें बढ़ीं : यह मामला सिर्फ अडानी समूह की छवि पर असर डालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़े करता है।
शेयर बाजार में गिरावट: इस विवाद के बाद अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर एक दिन में 23% तक गिर गए। निवेशकों का विश्वास: लगातार विवादों के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है।
निष्कर्ष : गौतम अडानी और उनकी कंपनी पर लग रहे ये आरोप सिर्फ कानूनी मसला नहीं हैं, बल्कि इसका असर भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है।
इस मामले की आगे की जांच और अदालत का फैसला यह तय करेगा कि अडानी समूह इस संकट से कैसे उबर पाता है। क्या यह मामला भारतीय उद्योग जगत की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा, या अडानी समूह आरोपों से खुद को मुक्त कर पाएगा? आप क्या सोचते हैं? अपनी राय जरूर बताएं।