दिल्ली के भारत मंडपम में इस वक्त AI इंपैक्ट समिट आयोजित हो रहा है। इस समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को आम लोगों की बेहतरी के लिए कैसे उपयोग किया जाए, इस पर गहन चर्चा की जा रही है। जहां एक ओर AI के फायदों पर बात हो रही है, वहीं इसके संभावित जोखिमों और चुनौतियों को भी गंभीरता से समझा जा रहा है।
इंडिया AI इंपैक्ट समिट में कुल 100 सेशन आयोजित किए जा रहे हैं। लगभग 700 टेक कंपनियां और साढ़े तीन हजार से अधिक स्पीकर्स इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स के आइडियाज़ और इनोवेशन पर भी मंथन हो रहा है।
समिट का एक प्रमुख फोकस देश के हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत बनाने में AI की भूमिका पर है। 17 फरवरी को समिट के दूसरे दिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की।
पहली पहल है स्ट्रेटजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर फॉर इंडिया (SAHI)।
दूसरी है बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई (BODH)।
इन दोनों पहलों का उद्देश्य हेल्थकेयर सेक्टर में AI के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना है।
अगर SAHI की बात करें तो यह मूल रूप से एक व्यापक गाइडलाइन फ्रेमवर्क है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में AI तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदारी के साथ हो। किसी भी AI सिस्टम को लागू करने से पहले उसकी सटीकता और सुरक्षा की जांच की जाएगी। इतना ही नहीं, सिस्टम लागू होने के बाद भी उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। SAHI राज्यों और स्वास्थ्य संस्थानों को यह दिशा देगा कि वे मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए AI का सही तरीके से इस्तेमाल करें।
अब बात करते हैं BODH प्लेटफॉर्म की। इसे IIT Kanpur और National Health Authority ने मिलकर विकसित किया है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य हेल्थ एआई मॉडल्स की निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से जांच करना है। यह मरीजों के स्वास्थ्य डेटा की मदद से AI सिस्टम की कार्यक्षमता को परखेगा, लेकिन निजी जानकारी की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी। किसी भी व्यक्ति का व्यक्तिगत हेल्थ डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
BODH को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत एक डिजिटल पब्लिक गुड के रूप में मान्यता दी गई है, यानी यह देशहित में विकसित की गई एक सार्वजनिक डिजिटल सुविधा है।
कुल मिलाकर, SAHI और BODH मिलकर भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में तकनीकी क्रांति ला सकते हैं। हालांकि, इन पहलों की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन्हें ज़मीन पर कितनी प्रभावी और जिम्मेदार तरीके से लागू किया जाता है।


